"प्रेमकथा" के अवतरणों में अंतर

23 बैट्स् नीकाले गए ,  3 वर्ष पहले
छो
2405:204:B00A:8973:B18E:4AE9:EB40:AC3F (Talk) के संपादनों को हटाकर Raju Jangid के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया
छो (2405:204:B00A:8973:B18E:4AE9:EB40:AC3F (Talk) के संपादनों को हटाकर Raju Jangid के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया)
टैग: प्रत्यापन्न
 
== लैला-मजनूं ==
[[हिन्दी|अरबी]] संस्कृति में दुखांत प्रेम कहानियों की पूरी श्रृंखला है, जिनमें कैस-लुबना, मारवा-अल मजनूं अल फरांसी, अंतरा-अबला, कुथैर-अजा, लैला-मजनूं की कहानियां प्रमुख हैं। लैला-मजनूं की प्रेम कहानी नई नहीं है। अरब के बानी आमिर जनजाति का था यह कवि यानी मजनूं। लैला भी इसी जाति से आती थीं। लैला के पिता के विरोध के कारण इनका विवाह नहीं हो सका और लैला किसी और की पत्नी हो गई। मजनूं पागल हो गए, इसी पागलपन में उन्होंने कई कविताएं रचीं। लैला पति के साथ ईराक चली गई, जहां कुछ ही समय बाद बीमार होकर उनकी मृत्यु हो गई। मजनूं भी कुछ समय बाद मौत की गोद में चले गए।
अरब और हबीब लोकसाहित्य से लेकर फारसी साहित्य तक यह प्रेम कथा कई रूपों में सामने आई। आम लोग इसे निजामी के पर्सियन संस्करण से ही जानते हैं। कहा जाता है कि रोमियो-जूलियट की कहानी लैला-मजनूं का ही लैटिन संस्करण है।