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→‎मघ्यकालीन इतिहास: प्रतिहार को गुर्जर प्रतिहार बोला जाता है, गुर्जर प्रतिहार एक वीर और साहसी जाति है
 
=== मघ्यकालीन इतिहास ===
हूण के शासन के पश्चात [[हर्षवर्धन]] द्वारा 7वीं शताब्दी में स्थापित राज्य की राजधानी [[कुरुक्षेत्र]] के पास [[थानेसर]] में बसायी। उसकी मौत के बाद गुर्जर प्रतिहार ने वहां शासन करना आरंभ कर दिया और अपनी राजधानी [[कन्नौज]] बना ली। यह स्थान दिल्ली के शासक के लिये महत्वपूर्ण था। [[पृथ्वीराज चौहान]] ने १२वीं शताब्दी में अपना किला [[हाँसी]] और [[तरावड़ी]] (पुराना नाम तराईन) में स्थापित कर लिया।[[मुहम्मद गौरी]] ने दुसरी [[तराइन का युद्ध|तराईन युध]] में इस पर कब्जा कर लिया। उसके पश्चात दिल्ली सल्तनत ने कई सदी तक यहाँ शासन किया।
 
विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा दिल्ली पर अधिकार के लिए अधिकतर युद्ध हरियाणा की धरती पर ही लड़े गए। तरावड़ी के युद्ध के अतिरिक्त [[पानीपत]] के मैदान में भी [[पानीपत के युद्ध|तीन युद्ध]] एसे लड़े गए जिन्होंने भारत के इतिहास की दिशा ही बदल दी। ब्रिटिश राज से मुक्ति पाने के आन्दोलनों में हरियाणा वासियों ने भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। रेवाड़ी के [[राजा राव तुला राम]] का नाम १८५७ के संग्राम में योगदान दिया।
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