"चीन की साम्यवादी क्रांति" के अवतरणों में अंतर

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च्यांग काई चेक के अधीन नानकिंग की सरकार अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए कियांग्सी की कम्यूनिस्ट सरकार के विरूद्ध 1934 ई. में भयंकर अभियान किया। इसे “उन्मूलन अभियान” के नास से जाना जाता है। लाखों की संख्या में कम्युनिस्टों को मौत के घाट उतारा गया। इस दमन और अत्याचार से बचने के लिए साम्यवादियों ने उत्तर में शेन्सी प्रांत की ओर “महाप्रस्थान” (Long March) किया जो 16 अक्टूबर, 1934 से प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर, 1935 में पूरा हुआ। इस 6000 मील लम्बी दूरी को अनेक नदियों, पहाड़ों, जंगलों को पार करते हुए शेन्सी प्रांत के येनान नगर में पहुँच कर उसे राजधानी बनाकर वहाँ अपनी सरकार स्थापित की।
 
यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि 1921 ई. में [[जापान]] ने चीन पर आक्रमण कर दिया था। च्यांग काई शेक ने इस समय जापानी खतरे से बड़ा खतरा [[साम्यवाद]] को समझा और अपनी सम्पूर्ण शक्ति साम्यवादियों के दमन में लगा दी। साम्यवादियों ने महाप्रस्थान कर जिस शेन्सी प्रांत में अपनी सरकार स्थापित की वह जापान द्वारा अधिकृत उत्तरी चीन के निकट था और साम्यवादियों ने जापानी आक्रमण और प्रभुत्व के विरोध की बात की। माओ ने कहा कि कुओमितांग और साम्यवादियों दोनों को मिलकर देश में एक सरकार की स्थापना करनी चाहिए और मिलकर जापानी आक्रमण का मुकाबला कर, उन्हें देश में एक सरकार की स्थापना करनी चाहिए और मिलकर जापानी आक्रमण का मुकाबला कर, उन्हें देश से बाहर कर देना चाहिए। साम्यवादियों के इस दृष्टिकोण से चीनी जनता का बहुमत उनके साथ हो गया फलतः साम्यवादी को अपनी शक्ति बढ़ाने का मौका मिला।
 
च्यांग काई शेक जापानियों को रोकने के बजाय कम्युनिस्टों का सफाया करना अधिक महत्वपूर्ण मानता था और इसलिए 1936 में साम्यवादियों से संघर्ष करने के लिए लियांग के नेतृत्व में एक सेना शेन्सी प्रांत भेजी किन्तु साम्यवादियों ने अपने चीनी भाईयों से लड़ना उचित नहीं समझा और लियांग के अधीन भेजी गई सेना को राष्ट्रीय चेतना से युक्त कर जापनियों से संघर्ष करने को कहा। जब च्यांग काई शेक ने साम्यवादियों के दमन की ही बात की तब लियांग ने उसे बंदी बना लिया किन्तु साम्यवादियों के हस्तक्षेप से अंततः वह मुक्त हुआ। अतः चीनी लोकमत की इच्छा को देखते हुए च्यांग ने साम्वादियों के साथ बातचीत आरंभ की और 1937 में एक समझौता किया ताकि सम्मिलित प्रयास करते हुए जापान के प्रभुत्व को नष्ट किया जा सके। इस समझौते के अनुसार उत्तर-पश्चिमी चीन के शेन्सी और कांगसू प्रांत पर साम्यवादियों के शासन को स्वीकार किया गया और साम्यवादी सेना को चीन की राष्ट्रीय सेना का अंग मान लिया गया जिसे जापान के विरूद्ध महासेनापति च्यांग काई शेक के आदेशों का पालन करना था। इस प्रकार चीन में दो पृथक-पृथक सरकार इस समय विद्यमान थी। दोनों की अपनी-अपनी पृथक् सेनाएँ थी और दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में अपने आदर्शों के अनुसार शासन और सामाजिक व्यवस्था के विकास में तत्पर थी। यह समझौता साम्यवादियों की शक्ति को बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।
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