"कल्पनाथ राय" के अवतरणों में अंतर

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राय, इंदिरा गाँधी और नरसिंहराव सरकारों में मंत्री रहे। राव सरकार में 1993-1994 में वे खाद्य मंत्रालय में राज्यमंत्री थे जब चीनी घोटाले में उनका नाम आया और उन्हें तिहाड़ जेल जाना पड़ा।<ref name="fin_exp"></ref> 1996 के चुनावों में वे तिहाड़ जेल में रहते हुए<ref>[http://indiatoday.intoday.in/story/elections-1996-kalpnath-rai-earns-upper-caste-support/1/281175.html Appealing for sympathy], इण्डिया टुडे, (अंग्रेजी में)</ref> ही घोसी से लोक सभा के लिये निर्दल प्रत्याशी के रूप में विजयी हुए। अपना आखिरी चुनाव उन्होंने समता पार्टी से लड़ा और इसमें भी वे विजयी रहे।
6 अगस्त 1999 को राय की मृत्य हृदयाघात से हुई।लेक
मऊ को जिला बनाने में इनका अद्वितीय योगदान रहा है
कहा जाता है कि ये मऊ को छोटा लखनऊ बनाना चाहते थे
कुछ लोगों का मानना है कि ये मऊ को सिंगापूर के तर्ज पर बनाना चाहते थे
कल्पनाथ राय चाहते थे की मऊ इतना विकशित जिला हो जाये की भविष्य में अगर पूर्वांचल का गठन हो तो मऊ पूर्वांचल की राजधानी हो।
लेकिन नीयति को कुछ और मंजूर था कहा जाता है होनी अटल है वह हो कर रहेगी अतः
6अगस्त 1999 को कल्पनाथ राय की मृत्य हृदयाघात से हो गई।
उनके जाने के बाद मऊ का विकाश ठहर ही गया
मानो मऊ के विकाश पर किसी की काली नजर लग गई हो
उन्ही की देन है कि मऊ आज भी छोटे शहरों में एक विकसित जिला है
मऊ की धरती आज भी इंतजार करती है कि कब कोई कल्पनाथ जैसा शिल्पिकार आयेगा और उसे विकाश की बुलंदी पर पहुंचाएगा।
 
गौरव पांडेय
6 अगस्त 1999 को राय की मृत्य हृदयाघात से हुई।<ref name="fin_exp"></ref> उनकी सफल राजनैतिक विरासत को उनके पुत्र और पत्नी सुधा राय के अंतर्द्वंद की भेंट चढ़ जाना पड़ा।
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