"ईश्वर" के अवतरणों में अंतर

102 बैट्स् जोड़े गए ,  1 वर्ष पहले
छो
छो (47.9.224.151 (Talk) के संपादनों को हटाकर J ansari के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया)
टैग: प्रत्यापन्न
== धर्म और दर्शन में परमेश्वर की अवधारणाएँ ==
; ईश्वर में विश्वास सम्बन्धी सिद्धान्त-
* '''[[ईश्वरवाद]]''' (थीज्मथीइज़म)
:* [[बहुदेववाद]]
:* [[एकेश्वरवाद]]
::* [[ईश्वरवाद]] (थीज्मथीइज़म)
::* [[तटस्थेश्वरवाद]] (deism)
::* [[सर्वेश्वरवाद]]
 
=== ईसाई धर्म ===
{{seealsoमुख्य|ईसाई धर्म}}
परमेश्वर एक में तीन है और साथ ही साथ तीन में एक है -- परमपिता, ईश्वरपुत्र [[ईसा मसीह]] और [[पवित्र आत्मा]]।
 
=== इस्लाम धर्म ===
{{मुख्य|इस्लाम}}
[[File:Allah3.svg|thumb|right|200px|[[अरबी भाषा]] में लिखा '''अल्लाह''' शब्द]]
वो ईश्वर को [[अल्लाह]] कहते हैं। [[इस्लाम धर्म]] की धार्मिक पुस्तक [[कुरान]] है और प्रत्येक मुसलमान ईश्वर शक्ति में विश्ववास रखता है।
इस्लाम मे 5 वक़्त की नामाज़ मुक़र्रर की गई है और हर नम्र फ़र्ज़ है।इस्लाम मे रमज़ान एक पाक महीना है जो कि 30 दिनों का होता है और 30 दिनों तक रोज़ रखना जायज़ हैजिसकी उम्र 12 या 12 से ज़्यादा हो।12 से कम उम्र पे रोज़ फ़र्ज़ नही।सेहत खराब की हालत में भी रोज़ फ़र्ज़ नही लेकिन रोज़े के बदले ज़कात देना फ़र्ज़ है।वैसा शख्स जो रोज़ा न रख सके किसी भी वजह से तो उसको उसके बदले ग़रीबो को खाना खिलाने और उसे पैसे देने या उस गरीब की जायज़ ख्वाइश पूरा करना लाज़मी है।
 
=== हिन्दू धर्म ===
{{मुख्य|हिन्दू धर्म}}
[[वेद]] के अनुसार व्यक्ति के भीतर पुरुष ईश्वर ही है। परमेश्वर एक ही है। वैदिक और पाश्चात्य मतों में परमेश्वर की अवधारणा में यह गहरा अन्तर है कि वेद के अनुसार ईश्वर भीतर और परे दोनों है जबकि पाश्चात्य धर्मों के अनुसार ईश्वर केवल परे है। ईश्वर परब्रह्म का सगुण रूप है।