"आर्य प्रवास सिद्धान्त" के अवतरणों में अंतर

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'''आर्यन प्रवास सिद्धांत''' (English - Indo-Aryan Migration Theory) मुख्यतः ब्रिटिश-जर्मन इतिहासकारों की मान्यता थी कि भारतीय [[आर्य]] संबोधन का यूरोपीय आर्यन जाति से सम्बन्ध है। भारत में आर्यों का यूरोपीय देशों वा [[मध्य एशिया|मध्य-एशिया]] से आगमन हुआ और भारत में भी अपनी सभ्यता स्थापित की । [[स्तॅपी|स्टेपी]] देहाती, जो अफगानिस्तान के उत्तर में विशाल मध्य एशिया घास के मैदानों से भारत चले गए, उन्हें अनौपचारिक रूप से [[आर्य]] कहा जाता है।<ref>{{cite web|url=https://hindi.thequint.com/news/world/genomic-study-vedic-aryan-migration-dravidian-languages-sanskrit|title=हम सब प्रवासी हैं, जगह जगह से आए और भारतीय बन गए: रिसर्च}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.firstpost.com/india/examining-the-evidence-for-aryan-migrations-into-india-the-story-of-our-ancestors-and-where-we-came-from-5797501.html|title=Examining the evidence for ‘Aryan’ migrations into India: The story of our ancestors and where we came from}}</ref><ref>{{cite web|url=https://indianexpress.com/article/explained/the-long-walk-did-the-aryans-migrate-into-india-new-genetics-study-adds-to-debate/|title=The Long Walk: Did the Aryans migrate into India? New genetics study adds to debate}}</ref><ref>{{cite web|url=https://scroll.in/article/874102/aryan-migration-everything-you-need-to-know-about-the-new-study-on-indian-genetics|title=Aryan migration: Everything you need to know about the new study on Indian genetics}}</ref>
 
उपरोक्त सिद्धांत का प्रतिपादन १९वीं शताब्दी के अंत में तब किया गया जब यूरोपीय भाषा-परिवार के सिद्धांत की स्थापना हुई ।<ref>{{cite web|url=https://www.bbc.com/hindi/india-46709161|title=आर्य बाहर से भारत आए थे: नज़रिया}}</ref> जिसके अंतर्गत, भारतीय भाषाओं में यूरोपीय भाषाओं से कई शाब्दिक समानताएं दिखीं । जैसे घोड़े को ग्रीक में इक्वस eqqus, फ़ारसी में ''इश्प'' और संस्कृत में ''अश्व'' कहते हैं । इसी तरह, भाई को लैटिन-ग्रीक में ''फ्रेटर'' (इसी से अंग्रेज़ी में फ्रेटर्निटी, Fraternity), फ़ारसी में ''बिरादर'' और संस्कृत में ''भ्रातृ'' कहते हैं। इस सिद्धांत की आलोचना-स्वीकार्यता दोनो हुई - उस समय अर्थात १८७० के समय भी । साथ ही इससे भारतीय-राजनीति में भाषा के आधार पर भेद आना शुरु हो गया - जो पहले भारतीय इतिहास में नहीं देखा गया था ।
 
== मुख्य सिद्धांत ==
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