"हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन" के अवतरणों में अंतर

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दल के तीन विभाग रखे गये थे - संगठन, प्रचार और सामरिक संगठन विभाग। संगठन का दायित्व विजय कुमार सिन्हा, प्रचार का दायित्व भगत सिंह और सामरिक विभाग का दायित्व चन्द्र शेखर आजाद को सौंपा गया था।।<ref name="क्रान्त"/>
== दल के प्रमुख कार्य ==
पहले दिसम्बर 1927 में राजेन्द्र लाहिडी, अशफाक उल्ला खाँ, राम प्रसाद 'बिस्मिल' तथा रोशन सिंह - चार को एक साथ फाँसी उसके बाद नवम्बर 1928 में [[लाला लाजपत राय]] की पुलिस के लाठी-प्रहार से हुई मृत्यु ने आग में घी का काम किया। इस दल ने एक माह के अन्दर ही साण्डर्स को दिन दहाडे गोली से भून कर लाला जी की मौत का बदला ले लिया। भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु तीनों फरार हो गये। इतने में ही सेण्ट्रल असेम्बली में पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्प्यूट बिल पेश हुआ तो इन युवकों ने बहरी सरकार को अपना विरोध दर्ज कराने की गर्ज से संसद में ही बम विस्फोट कर दिया। गिरफ्तारियाँ हुईं और क्रान्तिकारियों पर लाहौर षड्यन्त्र एवं असेम्बली बम काण्ड का मुकदमा चलाया गया। तीनतीनो को फाँसी की सजा से बचाने के लिये चन्द्र शेखर आजाद फरवरी 1931 में पण्डित [[जवाहरलाल नेहरू]] से इलाहाबाद में जाकर मिले भी परन्तु उसके कुछ ही घण्टे बाद अल्फ्रेड पार्क में शहीद हो गये। मार्च 1931 में सुखदेव, राजगुरु व भगत सिंह को [[लाहौर]] जेल में फाँसी दे दी गयी।।<ref name="क्रान्त"/>
 
== सन्दर्भ ==
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