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{{सन्दूक हिन्दु धर्म}}
हमारे [[जन्म]] से [[मृत्यु]] के बीच की अवधिकालावधि ही '''जीवन''' कहलाती है। लेकिन हमारा जन्म क्या हमारी इच्छा से होता है? नहीं, यह तो मात्र नर और मादा के संभोग का
परिणाम होता है जो [[प्रकृति]] के नियम के अंतर्गत है। इसके अतिरिक्त जीवन का मुख्य अंग एक [[चेतन तत्त्व]] है जो जीवन की सभी क्रियाओं का साक्षी होता है।
 
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जीवन का तात्पर्य अस्तित्व की उस अवस्था से है जिसमे वस्तु या प्राणी के अन्दर चेष्टा, उन्नति और वृद्धि के लक्षण दिखायी दें। अगर कोई वस्तु चेष्टारहित है तो फिर उसे सजीव या जीवनयुक्त नहीं माना जाता है। दार्शनिकों के अनुसार जीवन का संबंध जीने से है, सिर्फ अस्तित्व का विद्यमान होना ही जीवन का चिन्ह नहीं है।
 
अभी तक जीवन की कोई सारगर्भित और व्यापक रूप से स्वीकृत परिभाषा नहीं दी गयी है, लेकिन ज्यादातर परिभाषाएँ इसी महत्वपूर्ण तथ्य के इर्द-गिर्ध घूमती हैं कि "जीवन वह दशा है जो पशुओं, पौधों और दूसरे जीवित प्राणियों को अकार्बनिक और कृत्रिम चीजों से अलग करती है और जिसे सतत चलती रहने वाली चयापचय की क्रिया और वृद्धि की विशेष सामर्थ्य से पहचाना जाता है।"
 
 
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:जीवन]]
 
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
 
* [https://www.jivansutra.com/quotes/life-quotes-in-hindi/ जीवन पर प्रेरक और अनमोल विचार]
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