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भारत में सर्पो के प्रजातियों तथा बिषहीन , बिषाक्त सर्पो के पहचान।
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(भारत में सर्पो के प्रजातियों तथा बिषहीन , बिषाक्त सर्पो के पहचान।)
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[[चित्र:Snake in basket.jpg|thumb|right|200px|साँप]]
'''साँप''' या '''सर्प''', पृष्ठवंशी [[सरीसृप]] वर्ग का [[प्राणी]] है। यह [[जल (अणु)|जल]] तथा थल दोनों जगह पाया जाता है। इसका [[शरीर]] लम्बी [[रस्सी]] के समान होता है जो पूरा का पूरा स्केल्स से ढँका रहता है। साँप के [[पैर]] नहीं होते हैं। यह निचले भाग में उपस्थित घड़ारियों की सहायता से चलता फिरता है। इसकी आँखों में पलकें नहीं होती, ये हमेशा खुली रहती हैं। साँप विषैले तथा विषहीन दोनों प्रकार के होते हैं। इसके ऊपरी और निचले [[जबड़ा|जबड़े]] की हड्डियाँ इस प्रकार की सन्धि बनाती है जिसके कारण इसका मुँह बड़े आकार में खुलता है। इसके [[मुँह]] में [[विष]] की थैली होती है जिससे जुडे़ [[दाँत]] तेज तथा खोखले होते हैं अतः इसके काटते ही विष शरीर में प्रवेश कर जाता है। दुनिया में साँपों की कोई २५००-३००० प्रजातियाँ पाई जाती हैं।<ref>url=http जिनमे से भारत में poisnous सर्पो की 69 प्रजाति ज्ञात्त है जिनमे से 29 समुद्री सर्प तथा 40 स्थलीय सर्प है जहरीले सर्प के सिर में Poisonous Operator तथा ऊपरी जबड़े में एक जोड़ी जबड़े पाये जाते है । बिषहीन सर्पो के काटने पर अनेको छोटे गड्ढे सेमि सरकल में पाये जाते है।जबकि बिषाक्त सर्पो में केवल दो गहरे गड्ढे पाये जाते है।tp://www.reptileknowledge.com/articles/article9.php | accessondate=25.02.2008</ref> इसकी कुछ प्रजातियों का आकार १० सेण्टीमीटर होता है जबकि [[अजगर]] नामक साँप २५ फिट तक लम्बा होता है। साँप [[मेढक]], [[छिपकली]], [[पक्षी]], [[चूहा|चूहे]] तथा दूसरे साँपों को खाता है। यह कभी-कभी बड़े जन्तुओं को भी निगल जाता है।
 
सरीसृप वर्ग के अन्य सभी सदस्यों की तरह ही सर्प [[शीतरक्त का प्राणी]] है अर्थात् यह अपने शरीर का [[तापमान]] स्वंय नियंत्रित नहीं कर सकता है। इसके शरीर का तापमान वातावरण के ताप के अनुसार घटता या बढ़ता रहता है। यह अपने शरीर के तापमान को बढ़ाने के लिए भोजन पर निर्भर नहीं है इसलिए अत्यन्त कम भोजन मिलने पर भी यह जीवीत रहता है। कुछ साँपों को महीनों बाद-बाद भोजन मिलता है तथा कुछ सर्प वर्ष में मात्र एक बार या दो बार ढेड़ सारा खाना खाकर जीवीत रहते हैं। खाते समय साँप [[भोजन]] को चबाकर नहीं खाता है बल्कि पूरा का पूरा निकल जाता है। अधिकांश सर्पों के जबड़े इनके सिर से भी बड़े शिकार को निगल सकने के लिए अनुकुलित होते हैं। [[अफ्रीका]] का [[अजगर]] तो छोटी [[गाय]] आदि को भी नगल जाता है। विश्व का सबसे छोटा साँप थ्रेड स्नेक होता है। जो कैरेबियन सागर के सेट लुसिया माटिनिक तथा वारवडोस आदि द्वीपों में पाया जाता है वह केवल १०-१२ सेंटीमीटर लंबा होता है। विश्व का सबसे लंबा साँप रैटिकुलेटेड पेथोन (जालीदार अजगर) है, जो प्राय: १० मीटर से भी अधिक लंबा तथा १२० किलोग्राम वजन तक का पाया जाता है। यह दक्षिण -पूर्वी एशिया तथा फिलीपींस में मिलता है।<ref>{{cite web |url= http://khulasaa.com/index.php?option=com_content&view=article&id=116&Itemid=48|title=साँपों का संसार
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