"मिस्टर इंडिया (1987 फ़िल्म)" के अवतरणों में अंतर

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| gross = {{INRConvert|12|c|year=1987}}<ref>{{cite web|url=http://ibosnetwork.com/asp/filmbodetails.asp?id=Mr.+India|title=Mr. India|publisher=IBOS Network|accessdate=3 May 2014}}</ref>
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'''मिस्टर इंडिया''' 1987 में बनी हिन्दी भाषा की [[विज्ञान कथा फ़िल्म]] है। [[सलीम ख़ान|सलीम]]—[[जावेद अख्तर|जावेद]] द्वारा लिखी गई और [[शेखर कपूर]] द्वारा निर्देशित इस फिल्म में प्रमुख भूमिकाओं को [[अनिल कपूर]] और [[श्री देवी]] द्वारा निभाया गया है। [[अमरीश पुरी]], [[अशोक कुमार]], [[सतीश कौशिक]], [[अजीत वाच्छानी]] और [[शरत सक्सेना]] को सहायक भूमिका निभाने वालों में शामिल किया गया है।
 
यह फिल्म 1987 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म थी, और यह भारत में ऐतिहासिक छाप वाली फिल्म बनी हुई है। यह फिल्म श्रीदेवी के "मिस हवा हवाई" प्रदर्शन सहित कई लाइनों और गानों के लिए जानी जाती थी, और अमरीश पुरी का उद्धरण "मोगैम्बो खुश हुआ", जो बॉलीवुड के सबसे प्रसिद्ध उद्धरणों में से एक है और पुरी से समानार्थी बन गया है। मोगैम्बो चरित्र को बॉलीवुड के इतिहास में सबसे अच्छे खलनायकों में से एक माना जाता है। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीत ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, विशेष रूप से गीत "हवा हवाई", जो आज तक बहुत लोकप्रिय है। इस फिल्म को अक्सर शीर्ष बॉलीवुड फिल्मों की विभिन्न सूचियों में स्थान दिया गया है
एक दिन इसी तरह अरुण उस गैजेट का इस्तेमाल मोगेम्बो के गुंडों को सबक सिखाने में कर देता है। मोगेम्बो को पहले से ही गायब करने वाले गैजेट के बारे में कुछ पता रहता है और वो समझ जाता है कि कोई उसका ही इस्तेमाल कर रहा है। वो अब मिस्टर इंडिया की तलाश करने लगता है। वो कई जगह खिलोनों में बम रख देता है। उसमें से एक बम का शिकार अरुण के घर में रहने वाली अनाथ लड़की, टीना भी होती है।
 
काफी खोज करने के बाद मोगेम्बो के गुंडों को पता चलता है कि मिस्टर इंडिया जैसा कार्य उसके एक जूएँ के अड्डे में देखने को मिला है, जिसका लाभ अरुण वर्मा को हुआ है। वो अरुण वर्मा और उसके सभी साथियों को पकड़ कर लाने को कहता है। उन सभी को मोगेम्बो के अड्डे में लाते समय गलती से अरुण का गैजेट बीच में ही गिर जाता है। मोगेम्बो उस गैजेट को पाने के लिए मिस्टर इंडिया की पहचान बताने को कहता है और दो बच्चों को अम्ल (एसिड) में डालने की धमकी देता है। अरुण मान लेता है कि वही मिस्टर इंडिया है, पर उसके पास इस बात को साबित करने के लिए वो गैजेट नहीं होता है। परेशान हो कर मोगेम्बो उन्हें जेल में भर देता है।
 
वे सभी वहाँ से भागने में सफल हो जाते हैं और वहीं मोगेम्बो पूरे भारत को तबाह करने के लिए चार मिसाइल दागने की तैयारी करता है। अरुण को जब ये पता चलता है तो वो और मोगेम्बो के बीच लड़ाई शुरू हो जाती है। अरुण को पता चलता है कि मिसाइल को निष्क्रिय नहीं किया जा सकता, तो वो मिसाइल का रुख बदल कर मोगेम्बो के अड्डे को निशाना बना लेता है। अरुण और उसके सभी साथी उसके अड्डे से बाहर आ जाते हैं और मोगेम्बो अपने अड्डे के साथ ही विस्फोट में मारा जाता है। इसी के साथ कहानी समाप्त हो जाती है।
* [[युनुस परवेज़]] — मनिकलाल
* [[रमेश देव]] — पुलिस इंस्पेक्टर
* [[अंजान श्रीवास्तव]] — बाबूराम
 
== संगीत ==
| title1 = काटे नहीं कटते
| extra1 = [[किशोर कुमार]], [[अलीशा चिनॉय]]
| length1 = 6:38
 
| title2 = हवा हवाई
| extra2 = [[कविता कृष्णमूर्ति]]
| length2 = 7:03
 
| title3 = जिंदगी की यही रीत है
| extra3 = किशोर कुमार
| length3 = 5:14
 
| title4 = ना माँगे सोना चाँदी
| extra4 = [[अनुराधा पौडवाल]], [[शब्बीर कुमार]]
| length4 = 9:24
 
| title5 = जिंदगी की यही रीत है
| extra5 = किशोर कुमार
| length5 = 1:29
| note5 = दुखद
 
| title6 = करते हैं हम प्यार
| extra6 = कविता कृष्णमूर्ति, किशोर कुमार
| length6 = 6:37
 
| title7 = जिंदगी की यही रीत है
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''ना माँगे सोना चाँदी'' को मशहूर गीतों को ढाल कर बनाया गया है। क्रमशः वो हैं - "प्यार में सौदा नहीं" - (''[[बॉबी (1973 फ़िल्म)|बॉबी]]'') "चाहूँगा मैं तुझे सांज सवेरे" - (''[[दोस्ती (1964 फ़िल्म)|दोस्ती]]'') "सावन का महीना पवन करे शोर" - (''[[मिलन (1967 फ़िल्म)|मिलन]]'') "एक प्यार का नगमा है" - (''[[शोर (1972 फ़िल्म)|शोर]]'') "तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बंधन पुराना" - (''[[एक दूजे के लिये]]'') "डफली वाले डफली बजा" - (''[[सरगम (1979 फ़िल्म)|सरगम]]'') "मेरा नाम है चमेली" - (''[[राजा और रंक (1968 फ़िल्म)|राजा और रंक]]'') "खिलौना जान कर तुम तो" - (''[[खिलौना (1970 फ़िल्म)|खिलौना]]'') "झूठा है तेरा वादा, वादा तेरा वादा" - (''[[दुश्मन (19711972 फ़िल्म)|दुश्मन]]'') और ओम शांति ओम - (''[[कर्ज़ (फ़िल्म)|कर्ज़]]'')।
 
==सन्दर्भ==