"पुरुषार्थ" के अवतरणों में अंतर

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<ref>http://hariomgroup.org/hariombooks/paath/Hindi/ShriYogaVashishthaMaharamayan/ShriYogaVashihthaMaharamayan-Prakarana-2.pdf</ref>
 
पुरुषार्थ ____ स्वयं के आंतरिक विश्लेषण करके जिसमें स्वयं के लिए धर्म क्या है स्वयं के लिए अर्थ क्या है स्वयं के लिए काम क्या है स्वयं के लिए मोक्ष क्या है ।
धर्म अर्थात स्वयं के गृहस्थ जीवन या सन्यास जीवन या फिर कुछ और है ।
अर्थ स्वयं को समाज में क्या करना है जीविका के लिए।
काम स्वयं के प्रेम सम्बन्ध कैसा होना चाहिए।
मोक्ष जीवन के उद्देश्य क्या है ।
इन सबको जानकर उस प्रकार का जीवन जीना ही नियति का अनुसरण करना है ।
 
==धर्म==