"उच्चारण" के अवतरणों में अंतर

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Written by Vaishnavi pandey
 
 
[[चित्र:Ahoa eta eztarria zenbakiekin.png|thumb|1. नासिका (नाक); 2. ओष्ठ (ओठ); 3. दन्त; 4. तालु; 5. ]]
जिस प्रकार से कोई [[शब्द]] बोला जाता है; या कोई भाषा बोली जाती है; या कोई व्यक्ति किसी शब्द को बोलता है; उसे उसका '''उच्चारण''' (pronunciation)" कहते हैं। [[भाषाविज्ञान]] में उच्चारण के शास्त्रीय अध्ययन को [[ध्वनिविज्ञान]] की संज्ञा दी जाती है। भाषा के उच्चारण की ओर तभी ध्यान जाता है जब उसमें कोई असाधारणता होती है, जैसे
विभिन्न लोग या विभिन्न समुदाय एक ही शब्द को अलग-अलग तरीके से बोलते हैं। किसी शब्द को बोलने का ढ़ंग कई कारकों पर निर्भर करता है। इन कारकों में प्रमुख हैं - किस क्षेत्र में व्यक्ति रहकर बड़ा हुआ है; व्यक्ति में कोई वाक्-विकार है या नहीं; व्यक्ति का सामाजिक वर्ग; व्यक्ति की [[शिक्षा]], आदि
 
[[देवनागरी]] आदि लिपियों में लिखे शब्दों का उच्चारण नियत होता है किन्तु [[रोमन]], [[उर्दू]] आदि लिपियों में शब्दों की [[वर्तनी]] से उच्चारण का सीधा सम्बन्ध बहुत कम होता है। इसलिये [[अंग्रेजी]], [[फ्रेंच]] आदि भाषाओं के शब्दों के उच्चारण को बताने के लिये [[अन्तरराष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला]] ([[आईपीए]]) [[लिपि]] या आडियो फाइल या किसी अन्य विधि का सहारा लेना पड़ता है। किन्तु [[हिन्दी]], [[मराठी]], [[संस्कृत]], [[नेपाली]] आदि के शब्दों की वर्तनी ही उनके उच्चारण के लिये पर्याप्त है।
 
== परिचय ==
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