"उर्मिला भट्ट" के अवतरणों में अंतर

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(हिन्दी फिल्म)
 
==हिन्दी फिल्म==
अपने थियेटर के करियर में सफलता प्राप्त करने के बाद इन्हों ने हिन्दी फिल्मों में काम करना शुरू किया था। लगभग 1960 के दशक में इन्होंने ''गौरी'' (1968), ''संघर्ष'' (1968), और ''हमराज़'' (1967) में काम किया था। इनके फिल्मों में से कुछ प्रसिद्ध फिल्म ''अंखियों के झरोखों से'' (1978), ''गीत गाता चल'' (1975), ''बेशरम'' (1978), ''राम तेरी गंगा मैली'' (1985), ''बालिका बधू'' (1976), ''धुंध'' (1973) और ''अलीबाबा मर्जीना'' (1977) थे। इन फिल्मों के अलावा भी इन्होंने कई और फिल्मों में भी काम किया है। हालांकि बहुत से फिल्मों में इनका सहायक किरदार वाली भूमिका ही रहा है। इन्होंने कुल 125 हिन्दी फिल्मों में काम किया है। इसके अलावा दो प्रसिद्ध टीवी धारावाहिक: ''आकांक्षा'' (1989) और ''पेयिंग गेस्ट'' (1985) है।<ref>{{cite web|url=http://www.hungama.com/artists/urmila-bhatt-biography/7946 |title=Urmila Bhatt: Biography |publisher=Hungama.com |date= |accessdate=11 January 2014}}</ref
 
==मौत==
22 फरवरी 1997 को जुहू, मुंबई में इनके घर में ये मृत प्राप्त हुईं। ये बात तब सामने आई, जब इनके पारिवारिक दोस्त, विक्रम पारेख इनके घर इन्हें देखने आये थे। पड़ोस में रहने वाले युवक ने बताया कि नौकरनी भी सुबह घर के बेल बजा बजा कर थक के चले गई थी। विक्रम पारेख ने तुरंत उनकी बेटी, रचना को कॉल किया और उसके बाद पता चला कि घर को लूट लिया गया है और उर्मिला भट्ट मर चुकी हैं। इनके पति बरोदा में थे। पुलिस के अनुसार लूटना ही इसकी वजह हो सकता है।<ref>{{cite web|url=http://www.rediff.com/news/feb/24bhatt.htm |title=Rediff on the NeT: Actress Urmila Bhatt found murdered |publisher=Rediff.com |date= |accessdate=11 January 2014}}</ref>