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बहुत से तारों का निजी प्रकाश बहुत अधिक है, किंतु अत्याधिक दूरी पर स्थिर होने के कारण उनका दृश्य कांतिमान अधिक दिखलाई पड़ता है। यथार्थ कांतिमान तो तभी ज्ञात हो सकता है, जब वे उपमात्र से समान दूरी पर स्थित हों। समस्त तारों को १० पारसेक की दूरी पर कल्पित करके ज्ञात किए गए कांतिमान को निरपेक्ष कांतिमान कहते हैं। यदि हमें तारे का दृश्य कांतिमान ज्ञात हो तथा उसकी दूरी ज्ञात हो तो हम निम्नलिखित सूत्र से निरपेक्ष कांतिमान जान सकते हैं:
 
निरपेक्षकांतिमान दृश्यकांतिमान ५ - ५ लघुगणक दूरी, पारसेकों में है। विलोमत: यदि हमें निरपेक्ष कांतिमान ज्ञात हो तो हम तारों की दूरियाँ भी जान सकते हैं। सूर्य का निरपेक्ष कांतिमान ४.७ है।है।daadfbj he xbdgfsc ngdvg NH rfhf jgsf Hf f hgfc
 
=== सापेक्ष कांति (Relative luminosity) ===
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