"कालिदास" के अवतरणों में अंतर

13 बैट्स् जोड़े गए ,  1 वर्ष पहले
सम्पादन सारांश रहित
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
कालिदास ने शब्दालंकारों का स्वाभाविक प्रयोग किया है और उन्हें [[उपमा अलंकार]] के प्रयोग में सिद्धहस्त और उनकी उपमाओं को श्रेष्ठ माना जाता है।<ref>"उपमा कालिदासस्य...।"</ref> उदहारण के लिये:
<center>
<poem>
'''संचारिणी दीपशिखेव रात्रौ यं यं व्यतीयाय पतिंवरा सा।'''
 
'''नरेन्द्रमार्गाट्ट इव प्रपेदे विवर्णभावं स स भूमिपालः।।'''<ref>रघुवंशम् ६/६७ </ref>
</poem>
</center>
 
अर्थात् ''स्वयंवर में बारी-बारी से प्रत्येक राजा के सामने गमन करती हुई इन्दुमती राजाओं के सामने से चलती हुई दीपशिखा की तरह लग रही थी जिसके आगे बढ़ जाने पर राजाओं का मुख विवर्ण (रिजेक्ट कर दिए जाने से अंधकारमय, मलिन) हो जाता था।''
 
=== अभिव्यंजना ===
344

सम्पादन