"भारत भारती (काव्यकृति)" के अवतरणों में अंतर

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टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन यथादृश्य संपादिका
:स्वच्छन्दता से कर तुझे करने पड़ें प्रस्ताव जो,
:जग जायँ तेरी नोंक से सोये हुए हों भाव जो। ॥२॥
 
 
:संसार में किसका समय है एक सा रहता सदा,
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