"सायण" के अवतरणों में अंतर

133 बैट्स् जोड़े गए ,  1 वर्ष पहले
== वेदभाष्यों का महत्व ==
सायण से पहले भी वेद की व्याख्याएँ की गई थीं। कुछ उपलब्ध भी हैं। परंचु समस्त वेद की ग्रंथ राशि का इतना सुचिंतित भाष्य इतःपूर्व प्रणीत नहीं हुआ था। सायण का यह वेदभाष्य अवश्य ही याज्ञिक विधि-विधानों की दृष्टि से रखकर लिखा गया है, परंतु इसका यह मतलब नहीं कि उन्होंने वेद के आध्यात्मिक अर्थ की ओर संकेत न किया हो। वैदिक मंत्रों का अर्थ तो सर्वप्रथम ब्राह्मण ग्रंथों में किया गया था और इसी के आधार पर निघंटु में शब्दों के अर्थ का और निरुक्त में उन अर्थों के विशदीकरण का कार्य संपन्न हुआ था। निरुक्त में इने-गिने मंत्रों का ही तात्पर्य उन्मीलित है। इतने विशाल वैदिक वां मय के अर्थ तथा तात्पर्य के प्रकटीकरण के निमित्त सायण को ही श्रेय है। वेद के विषम दुर्ग के रहस्य खोलने के लिए सायण भाष्य सचमुच चाभी का काम करता है। आज वेदार्थ मीमांसा की नई पद्धतियों का जन्म भले हो गया हो, परंतु वेद की अर्थ मीमांसा में पंडितों का प्रवेश सायण के ही प्रयत्नों का फल है। आज का वेदार्थ परिशीली आलोचक आचार्य सायण का विशेष रूप से ऋणी है। मैक्समूलर आदि पाश्चात्य विद्वानों ने इसी भाष्य के वल पर ही वैदिक साहित्य में गति बढाया है। वेदार्थ मीमांसा के इतिहास में सायण का नाम सुवर्णाक्षरों में लिखने योग्य है।
 
==इन्हें भी देखें==
* [[ऋग्भाष्य-पदार्थ-कोष]]
 
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{Reflist}}
 
== बाहरी कड़ियाँ ==