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अखिल भारतीय जनसंघ के चुनावी घोषणा पत्र के मुद्दें, 1.हिन्दुओं के हितों की रक्षा,और सम्मान । 2.हिन्दुत्व ,3.राममंदिर निर्माण ,। 4.रामराज्य की स्थापना,। 5.वैदिक भारतीय संस्कृति की रक्षा ,। 6.कश्मीरी पंडितों की घर वापिसी,। 7.धारा 370 को समाप्त करके शांति कायम करना,। 8.समान नागरिक संहिता लागू करना,। 9.गौ हत्या कानून बनाना,। 10.आरक्षण मुक्त भारत का निर्माण ,। 11.प्रतिभाओं का पलायन रोकना ,। 12.किसानों को फसल का उचित दाम ,। 13. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना,। 14.बेरोजगारों को रोजगार ,।
(मधोक जनसंघ के जनता पार्टी में विलय के खिलाफ थे। 1979 में उन्होंने 'भारतीय जनसंघ' को जनता पार्टी से अलग कर लिया। उन्होंने अपनी पार्टी को बढ़ाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन सफलता हासिल नहीं हुई। 96 वर्ष की आयु में 2 मई 2016 को उनकी मृत्यु हो गई।)
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(अखिल भारतीय जनसंघ के चुनावी घोषणा पत्र के मुद्दें, 1.हिन्दुओं के हितों की रक्षा,और सम्मान । 2.हिन्दुत्व ,3.राममंदिर निर्माण ,। 4.रामराज्य की स्थापना,। 5.वैदिक भारतीय संस्कृति की रक्षा ,। 6.कश्मीरी पंडितों की घर वापिसी,। 7.धारा 370 को समाप्त करके शांति कायम करना,। 8.समान नागरिक संहिता लागू करना,। 9.गौ हत्या कानून बनाना,। 10.आरक्षण मुक्त भारत का निर्माण ,। 11.प्रतिभाओं का पलायन रोकना ,। 12.किसानों को फसल का उचित दाम ,। 13. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना,। 14.बेरोजगारों को रोजगार ,।)
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आपातकाल से पहले बिहार विधानसभा के भारतीय जनसंघ के विधायक दल के नेता [[लालमुनि चौबे]] ने [[जयप्रकाश नारायण]] के आंदोलन में बिहार विधानसभा से अपना त्यागपत्र दे दिया। जनता पार्टी 1980 में टूट गयी और जनसंघ की विचारधारा के नेताओं नें [[भारतीय जनता पार्टी]] का गठन किया। भारतीय जनता पार्टी [[1998]] से [[2004]] तक [[राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक गठबंधन]] (NDA) सरकार की सबसे बड़ी पार्टी रही थी। 2014 के आम चुनाव में इसने अकेले अपने दम पर सरकार बनाने में सफलता प्राप्त की।
 
अखिल भारतीय जनसंघ के चुनावी घोषणा पत्र के     मुद्दें,
 
1.हिन्दुओं के हितों की रक्षा,और सम्मान ।
 
2.हिन्दुत्व
 
,3.राममंदिर निर्माण ,।
 
4.रामराज्य की स्थापना,।
 
5.वैदिक भारतीय संस्कृति की रक्षा ,।
 
6.कश्मीरी पंडितों की घर वापिसी,।
 
7.धारा 370 को समाप्त करके शांति कायम करना,।
 
8.समान नागरिक संहिता लागू करना,।
 
9.गौ हत्या कानून बनाना,।
 
10.आरक्षण मुक्त भारत का निर्माण ,।
 
11.प्रतिभाओं का पलायन रोकना ,।
 
12.किसानों को फसल का उचित दाम ,।
 
13. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना,।
 
14.बेरोजगारों को रोजगार ,।
 
15.महिलाओं को सम्मान, ।
 
16.आम नागरिक को शिक्षा व स्वास्थ्य तथा आम जनता को शीघ्र न्याय दिलाना व धर्मसाक्षेप  राजनीति ।
 
ये अखिल भारतीय जनसंघ का दायत्वि व जिम्मेदारी होगी अपना अमूल्य वोट देकर विजयी बनायें ।
 
भारत वर्ष के सभी प्रदेशों राज्यों के कार्यकर्ता बन्धु  विशेष ध्यान दें।  इस विनम्र संदेश को आगे शेयर करें वअधिक से अधिक फैलायें।(अभाजसंघ)अखिल भारतीय जनसंघ नईदिल्ली की स्वीकार्यता व लोकप्रियता सम्पूर्ण देश में बढ़ रही है।
 
अखिल भारतीय जनसंघ नईदिल्ली का सदस्यता अभियान शुरू हो चुका है।सम्पर्क करें
 
अखिल भारतीय संगठनमंत्री
 
माननीय श्री देशकुमार कौशिक  9990251150
 
एकात्म मानवदर्शन के द्रष्टा पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती 25 सितंबर को है। दीनदयालउपाध्यायअखिल भारतीय जनसंघ के राजनीतिक- वैचारिक अधिष्ठाता हैं। इसलिए अखिल भारतीय जनसंघ नईदिल्लीके लिए यह तारीख बहुत महत्त्वपूर्ण है। उनके विचारों और उनके दर्शन को जन सामान्य तक पहुंचाने के लिए अखिल भारतीय जनसंघ  ने इस बार खास तैयारी की है। दीनदयाल उपाध्याय लगभग 15 वर्ष जनसंघ के महासचिव रहे। वर्ष 1967 में उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष भी चुना गया। चूंकि उन्हें केरल के कालीकट (कोझीकोड) में राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। इसलिए दीनदयाल जन्म शताब्दी समारोह के अवसर पर 25 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केरल के कोझीकोड से विशेष उद्बोधन दिया था।
 
भारतीय राजनीति में  वर्तमान समय अखिल भारतीय जनसंघ का  आने वाला है। और भविष्य उज्जवल दिखाई देरहा है।
 
एक समय में राजनीतिक अछूत समझी जाने वाली अभाजसंघ की स्वीकार्यता सम्पूर्ण देश में बढ़ रही है। अपनी बढ़ती स्वीकार्यता के इस दौर में अखिल भारतीय जनसंघ को दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन को अपने व्यवहार में लेकर चलना होगा।
 
जहां अब समय भाजपा से दीनदयाल दर्शन को छूटने का है।, वहीं वह राजनीतिक पटरी से फिसलकर रसातल में पहुँच जाएगी। क्योंकि, यह चिंतन ही भाजपा को 'औरों से अलग' पहचान दिलाता था। इसलिए भाजपानीत सरकारों को ध्यान रखना चाहिए था कि उनकी शासन व्यवस्था में 'भारतीयता' दिखनी ही चाहिए। लेकिन वर्तमान समय में आये बदलाव के कारण  भाजपा में दीनदयाल उपाध्याय व डा.श्यामा प्रसाद मुखर्जी प्रो.बलराज मधोक के आदर्शों व दर्शन को त्याग  दिया  है। और वर्तमान समय में आये बदलाव के कारण  भाजपानीत सरकारों व उनकी शासन व्यवस्था में 'भारतीयता' दिखनी बन्द हो गयी है। इसीलिए भाजपा अब राजनीतिक पटरी से फिसलकर रसातल में पहुँच रही है।भारतीय जनता का भारतीय जनता पार्टी से मोह भंग हो रहा है।
 
इतिहास इस बात का साक्षी हैं कि 50 से 100 वर्षों के अंतराल में संसार के विभिन्न थानों और देशों में उथल-पुथल होती हैं। जिसके फलस्वरूप उन भू-भागों और देशों में महत्वपूर्ण बदल आते हैं, संसार के मानचित्र से कई राज्य लुप्त हो जाते हैं या खंडित हो जाते हैं और कई नये राज्य अस्तित्व में आ जाते हैं। भारत अथवा हिन्दुस्तान में 1947 में एक ऐसा उथल-पुथल हुआ था। गत कुछ समय से भारत के अन्दर और इस के इर्द-गिर्द के देशों में चलने वाले घटना चक्र से लगता हैं कि भारत उसी प्रकार के एक और उथल-पुथल की ओर बढ़ रहा हैं। इस शताब्दी को यह अंतिम वर्ष इस दृष्टि से विशेष महत्व रखता हैं। इसलिए 1999 में होने वाले लोकसभा चुनाव के निर्णायक माना जा रहा हैं। यदि इस चुनाव में राष्ट्रवादी प्रत्याषी अधिक संख्या में जीते और दिल्ली में योग्य और चरित्रवान प्रधानमंत्री वाली राष्ट्रवादी सरकार बन पाई तो आने वाली उथल-पुथल इस देश को पुनः अखंड करने का मार्ग प्रशस्त कर सकता हैं और इस के भविष्य को उज्जवल बना सकता हैं।
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