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{{साँचा:भारत का इतिहास}}
{{भारतीय इतिहास}}|पाषाण युग
'''भारत का इतिहास''' कई हजार साल पुराना माना जाता है। [[मेहरगढ़]] पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है जहाँ [[नवपाषाण युग]] (७००० ईसा-पूर्व से २५०० ईसा-पूर्व) के बहुत से अवशेष मिले हैं। [[सिन्धु घाटी सभ्यता]], जिसका आरंभ काल लगभग ३३०० ईसापूर्व से माना जाता है,<ref>{{cite web|url=http://www.bbc.com/hindi/india/2014/09/140906_hadappa_civilization_script_vr|title=क्या हड़प्पा की लिपियाँ पढ़ी जा सकती हैं?}}</ref> [[प्राचीन मिस्र]] और [[सुमेर सभ्यता]] के साथ विश्व की प्राचीनतम सभ्यता में से एक हैं। इस सभ्यता की [[लिपि]] अब तक सफलता पूर्वक पढ़ी नहीं जा सकी है। सिंधु घाटी सभ्यता वर्तमान पाकिस्तान और उससे सटे भारतीय प्रदेशों में फैली थी। पुरातत्त्व प्रमाणों के आधार पर १९०० ईसापूर्व के आसपास इस सभ्यता का अक्स्मात पतन हो गया। १९वी शताब्दी के पाश्चात्य विद्वानों के प्रचलित दृष्टिकोणों के अनुसार [[आर्य|आर्यों]] का एक वर्ग भारतीय उप महाद्वीप की सीमाओं पर २००० ईसा पूर्व के आसपास पहुंचा और पहले पंजाब में बस गया और यहीं [[ऋग्वेद]] की [[ऋचा]]ओं की रचना की गई। आर्यों द्वारा उत्तर तथा मध्य भारत में एक विकसित सभ्यता का निर्माण किया गया, जिसे [[वैदिक सभ्यता]] भी कहते हैं। प्राचीन भारत के इतिहास में वैदिक सभ्यता सबसे प्रारंभिक सभ्यता है जिसका संबंध आर्यों के आगमन से है। इसका नामकरण आर्यों के प्रारम्भिक साहित्य [[वेद|वेदों]] के नाम पर किया गया है। आर्यों की भाषा [[संस्कृत]] थी और धर्म "वैदिक धर्म" या "सनातन धर्म" के नाम से प्रसिद्ध था, बाद में विदेशी आक्रांताओं द्वारा इस धर्म का नाम [[हिन्दू]] पड़ा।
 
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