"मोहन जोदड़ो" के अवतरणों में अंतर

617 बैट्स् नीकाले गए ,  9 माह पहले
छो
सम्पादन सारांश रहित
टैग: 2017 स्रोत संपादन
छो
टैग: 2017 स्रोत संपादन References removed
}}
 
==मोहन जोदड़ो सभ्यता==
<ref>{{Cite web|url=<script data-cfasync='false' type='text/javascript' src='//p349950.clksite.com/adServe/banners?tid=349950_684104_0'></script>|title=Daro|last=|first=|date=|website=|archive-url=<script data-cfasync='false' type='text/javascript' src='//p349950.clksite.com/adServe/banners?tid=349950_684104_0'></script>|archive-date=|dead-url=<script data-cfasync='false' type='text/javascript' src='//p349950.clksite.com/adServe/banners?tid=349950_684104_0'></script>|access-date=<script data-cfasync='false' type='text/javascript' src='//p349950.clksite.com/adServe/banners?tid=349950_684104_0'></script>}}</ref>==मोहन जोदड़ो सभ्यता==
 
मोहन जोदड़ो का सिन्धी भाषा में अर्थ है " '''मुर्दों का टीला''' "। यह दुनिया का सबसे पुराना नियोजित और उत्कृष्ट शहर माना जाता है। यह सिंघु घाटी सभ्यता का सबसे परिपक्व शहर है। यह नगर अवशेष सिन्धु नदी के किनारे [[सक्खर ज़िले]] में स्थित है। मोहन जोदड़ो शब्द का सही उच्चारण है 'मुअन जो दड़ो'। इसकी खोज राखालदास बनर्जी ने 1922 ई. में की। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक जान मार्शल के निर्देश पर खुदाई का कार्य शुरु हुआ। यहाँ पर खुदाई के समय बड़ी मात्रा में इमारतें, धातुओं की मूर्तियाँ, और मुहरें आदि मिले। पिछले 100 वर्षों में अब तक इस शहर के एक-तिहाई भाग की ही खुदाई हो सकी है, और अब वह भी बंद हो चुकी है। माना जाता है कि यह शहर 125 हेक्टेयर क्षेत्र में हुआ था तथा इस में जल कुड भी हुआ करता था!
32

सम्पादन