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== पर्यटन स्थल ==
 
*'''मकरमपुर बजरंगबली मन्दिर, मकरमपुर, बेनीपुर:-*'''
#ध्वजारोहण। मकरमपुर, बेनीपुर, दरभंगा(बिहार) एक नजर ध्वजा- रोहण का इतिहास मकरमुर गाँव के सभी मुल वासिन्दे जलेवार गरौल के हैं ।गरौल जो अभी तारडीह प्रखंड में अवस्थित है ,यहाँ भुतकाल में अन्य धर्मावलंबियों से उपद्रव ग्रस्त होने के कारण वहाँ से अभी के गाँव मकरमपुर जो सर्वे के अनुसार परूषोत्तमपुर के नाम से जाना जाता रहा है,में आके बसे जो भादव कृष्ण नवमी का दिन था ।उसी दिन महावीर जी का ध्वजारोहण किया गया।कालान्तर में दरभंगा महाराज से यहाँ का एक परिवार जो अभी बंगला घराना के नाम से जाना जाता है ,उनका हरीयठ मौजा को लेकर भीषण लडाई हुई जिसमें कानूनी ढंग से ईन लोगों कि जीत हुई ।ईसी संदर्भ में ईन लोगों यह मनौती किया था कि अगर हमारी जीत हुई तो दोहरी ध्वजा महावीर जो को देंगे ।कालान्तर में यह अौर लोगों द्वारा अनुकरण प्रारंभ हुआ,अौर लोग अपनी मनोकामना पुरा होने पर ध्वजा देने लगे । यहाँ स्वर्गीय ललित नारायण मिश्रा ,पं हरिनाथ मिश्र,कृति झा आजाद सहित बहुत गणमान्य लोगों ने मनोकामना पुर्ण होने के उपरान्त ध्वजारोजण किया । यहाँ महावीर जी का मुख्य भोग चुडा -दही ,लड्डू ,केला ,मिठाई आदि का भोग लगाया जाता है। तथा प्रत्येक ध्वजा पर तीन ब्राह्मण ,दो कुंवारी कन्या को प्रसाद भोजन कराया जाता है । ईसका प्राण प्रतिस्ठा पुजन बंगला परिवार के द्वारा करवाया जाता है।अब यहाँ कई जिला ,प्रदेश, शहर ,परोसी देस नेपाल के लोग अभी हजारों हजार कि संख्या में ध्वजारोहण करते हैं तथा मनौति पुरा करते है ! नोट- आप सभी सदर आमंत्रित है
 
; दरभंगा शहर के दर्शनीय स्थल
* '''दरभंगा राज परिसर एवं किला''':
* '''देवकुली धाम''': बिरौल प्रखंड के देवकुली गाँव में शिव का प्राचीन मंदिर है जहाँ प्रत्येक रविवार को पुजा हेतु भीड होती है। शिवरात्रि के दिन यहाँ मेला भी लगता है।
* '''नेवारी''': बेरौल से १३ किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान राजा लोरिक के प्राचीन किला के लिए प्रसिद्ध है।
 
मकरमपुर बजरंगबली मन्दिर, मकरमपुर, बेनीपुर:- #ध्वजारोहण। मकरमपुर, बेनीपुर, दरभंगा(बिहार)
एक नजर ध्वजा- रोहण का इतिहास मकरमुर गाँव के सभी मुल वासिन्दे जलेवार गरौल के हैं ।गरौल जो अभी तारडीह प्रखंड में अवस्थित है ,यहाँ भुतकाल में अन्य धर्मावलंबियों से उपद्रव ग्रस्त होने के कारण वहाँ से अभी के गाँव मकरमपुर जो सर्वे के अनुसार परूषोत्तमपुर के नाम से जाना जाता रहा है,में आके बसे जो भादव कृष्ण नवमी का दिन था ।उसी दिन महावीर जी का ध्वजारोहण किया गया।कालान्तर में दरभंगा महाराज से यहाँ का एक परिवार जो अभी बंगला घराना के नाम से जाना जाता है ,उनका हरीयठ मौजा को लेकर भीषण लडाई हुई जिसमें कानूनी ढंग से ईन लोगों कि जीत हुई ।ईसी संदर्भ में ईन लोगों यह मनौती किया था कि अगर हमारी जीत हुई तो दोहरी ध्वजा महावीर जो को देंगे ।कालान्तर में यह अौर लोगों द्वारा अनुकरण प्रारंभ हुआ,अौर लोग अपनी मनोकामना पुरा होने पर ध्वजा देने लगे । यहाँ स्वर्गीय ललित नारायण मिश्रा ,पं हरिनाथ मिश्र,कृति झा आजाद सहित बहुत गणमान्य लोगों ने मनोकामना पुर्ण होने के उपरान्त ध्वजारोजण किया । यहाँ महावीर जी का मुख्य भोग चुडा -दही ,लड्डू ,केला ,मिठाई आदि का भोग लगाया जाता है। तथा प्रत्येक ध्वजा पर तीन ब्राह्मण ,दो कुंवारी कन्या को प्रसाद भोजन कराया जाता है । ईसका प्राण प्रतिस्ठा पुजन बंगला परिवार के द्वारा करवाया जाता है।अब यहाँ कई जिला ,प्रदेश, शहर ,परोसी देस नेपाल के लोग अभी हजारों हजार कि संख्या में ध्वजारोहण करते हैं तथा मनौति पुरा करते है ! नोट- आप सभी सदर आमंत्रित है
 
== यातायात एवं संचार ==