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मीना कुमारी की नानी हेमसुन्दरी मुखर्जी [[पारसी रंगमंच]] से जुड़ी हुईं थी। [[बंगाल]] के प्रतिष्ठित टैगोर परिवार के पुत्र जदुनंदन टैगोर (1840-62) ने परिवार की इच्छा के विरूद्ध हेमसुन्दरी से विवाह कर लिया। 1862 में दुर्भाग्य से जदुनंदन का देहांत होने के बाद हेमसुन्दरी को बंगाल छोड़कर [[मेरठ]] आना पड़ा। यहां अस्पताल में नर्स की नौकरी करते हुए उन्होंने एक [[उर्दू]] के पत्रकार प्यारेलाल शंकर मेरठी (जो कि ईसाई था) से शादी करके [[ईसाई]] धर्म अपना लिया। हेमसुन्दरी की दो पुत्री हुईं जिनमें से एक प्रभावती, मीना कुमारी की माँ थीं।
 
==फ़िल्मी सफर व निजी जीवन==
===शुरुआती फिल्में (1939-52)===
महजबीं पहली बार 1939 में फिल्म निर्देशक विजय भट्ट की फिल्म "लैदरफेस" में बेबी महज़बीं के रूप में नज़र आईं। 1940 की फिल्म "एक ही भूल" में [[विजय भट्ट]] ने इनका नाम बेबी महजबीं से बदल कर बेबी मीना कर दिया। 1946 में आई फिल्म ''बच्चों का खेल'' से बेबी मीना 13 वर्ष की आयु में मीना कुमारी बनीं। मार्च 1947 में लम्बे समय तक बीमार रहने के कारण उनकी माँ की मृत्यु हो गई। मीना कुमारी की प्रारंभिक फिल्में ज्यादातर पौराणिक कथाओं पर आधारित थीं जिनमें ''हनुमान पाताल विजय'', ''वीर घटोत्कच'' व ''श्री गणेश महिमा'' प्रमुख हैं।
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