"जीवनचरित" के अवतरणों में अंतर

92 बैट्स् नीकाले गए ,  2 वर्ष पहले
छो
2409:4064:2501:2A1C:0:0:101B:28A0 द्वारा किये गये 3 सम्पादन पूर्ववत किये। (बर्बरता)। (ट्विंकल)
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
छो (2409:4064:2501:2A1C:0:0:101B:28A0 द्वारा किये गये 3 सम्पादन पूर्ववत किये। (बर्बरता)। (ट्विंकल))
टैग: किए हुए कार्य को पूर्ववत करना
 
जीवनचरित की सीमा का यदि विस्तार किया जाय तो उसके अंतर्गत [[आत्मकथा]] भी आ जायगी। यद्यपि दोनों के लेखक पारस्परिक रुचि और संबद्ध विषय की भिन्नता के कारण घटनाओं के यथार्थ आलेखन में सत्य का निर्वाह समान रूप से नहीं कर पाते। आत्मकथा के लेखक में सतर्कता के बावजूद वह आलोचनात्मक तर्कना चरित्र विश्लेषण और स्पष्टचारिता नहीं आ पाती जो जीवनचरित के लेखक विशिष्टता होती है। इस भिन्नता के लिये किसी को दोषी नहीं माना जा सकता। ऐसा होना पूर्णत: स्वाभाविक है।
आर्यन आर्य +918539095768
 
== इतिहास ==
 
[[नाभा दास]] का "[[भक्तमाल]]" तथा उसपर प्रियादास की टीका भक्तों के जीवनचरित के संग्रह ग्रंथ हैं। कई अन्य भक्तकवियों ने भी "भक्तमाल" नाम से जीवनचरित संग्रह ग्रंथों की रचना की। पुष्टिमार्गीय वैष्णव संतों और कवियों के ब्रजभाषा गद्य में अंकित जीवनचरित के दो संग्रह "[[चौरासी वैष्णवन की वार्ता]]" और "[[दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता]]" अपने ढंग से बेजोड़ ग्रंथ हैं।
aryan arya
08539095768
 
=== आधुनिक युग ===
आधुनिक गद्य काल में तो अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन आदि पश्चिमी भाषाओं के साथ साथ [[हिंदी]], [[बंगला]], [[मराठी]] आदि में भी प्रसिद्ध व्यक्तियों के जीवनचरित लिखने की प्रवृत्ति यथेष्ट रूप से बढ़ती जा रही है। आत्मकथाओं में [[महात्मा गांधी]] की "[[सत्य के प्रयोग]]" शीर्षक [[आत्मकथा]], देशरत्न स्व. [[राजेन्द्र प्रसाद]] की आत्मकथा इस प्रसंग में विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
by aryan arya 08539095768
 
==सन्दर्भ==
49

सम्पादन