"थार मरुस्थल" के अवतरणों में अंतर

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थार मरुस्थल अद्भुत है। गर्मियों में यहां की रेत उबलती है। इस मरुभूमि में 52 डिग्री सेल्शियस तक तापमान रिकार्ड किया गया है। जबकि सर्दियों में तापमान शून्य से नीचे चला जाता है। जिसका मुख्य कारण हैं यहाँ की बालू रेत जो जल्दी गर्म और जल्दी ठंडी हो जाती है।
गरमियों में मरुस्थल की तेज गर्म हवाएं चलती है जिन्हें "लू" कहते हैं तथा रेत के टीलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाती हैं और टीलों को नई आकृतियां प्रदान करती हैं। गर्मी ऋतु में यहां पर तेज आंधियां चलती है जो रेत के बड़े-बड़े टीलों को दूसरे स्थानों पर धकेल देती है जिससे यहां मरुस्थलीकरण की समस्या बढ़ती जाती है आंधियों के दिनों में चोरी करने वाले लोग आसानी से अपना काम निपटा लेते हैं क्योंकि उनके पैरों के निशान तेज आंधी के कारण मिट जाते हैं तो लोगों को चोरों की यथासंभव दिशा का पता नहीं चल पाता है कि चोर कौन सी दिशा में गया हैहै।
 
== जन-जीवन ==
 
प्रसिद्ध गैर व अग्नि नर्तक इस समारोह का मुख्य आकर्षण होते है। पगड़ी बांधने व मरू श्री की प्रतियोगिताएं समारोह के उत्साह को दुगना कर देती है। सम बालु के टीलों की यात्रा पर समापन होता है, वहां ऊंट की सवारी का आनंद उठा सकते हैं और पूर्णमासी की चांदनी रात में टीलों की सुरम्य पृष्ठभूमि में लोक कलाकारों का उत्कृष्ट कार्यक्रम होता है।
 
==सन्दर्भ
Ravi Kant bishnoi
 
rajasthan ke logo ko ab yaha ki aadat ho chuki hai, bahar se aaye logo ko yahan lambe samaya rahne par asuvidah ho sakti hai.
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
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