"आर्य प्रवास सिद्धान्त" के अवतरणों में अंतर

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== समर्थन तथा आलोचना ==
वहीं कई निम्नवर्ग,लोगों भिन्नऔर धर्महाल केही लोगोंमें आनुवंशिक अध्ययन ने इस सिद्धांत का समर्थन किया। साथ ही कई क्रांतिकारी जैसे [[बाल गंगाधर तिलक]], के० एम० मुंशी जी ने भी समर्थन किया।<ref>लोपामुद्रा लेखक के० एम० मुंशी</ref> परंतु जब इनसे अन्यों ने प्रश्न किया तो इनका उत्तर था कि इन्होंने केवल ऋग्वेद के आंग्लानुवाद को पढ़ा है।
<blockquote>
'''आमी मूल वेद अध्ययन कारि नाई, आमी साहिब दिगेर अनुवाद पाठ करिया छि।'''<ref>मानवेर आदि जन्मभूमि लेखक - उमेशचन्द्र विद्यारत्न</ref>
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