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== जीवन ==
 
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कथाओं और किम्वादंतियों के अनुसार कालिदास शक्लो-सूरत से सुंदर थे और [[विक्रमादित्य]] के दरबार के [[नवरत्नों]] में एक थे। कहा जाता है कि प्रारंभिक जीवन में कालिदास अनपढ़ और मूर्ख थे।
 
 
== रचनाएं ==
Sakshiछोटीछोटी-बड़ी कुल लगभग चालीस रचनाएँ हैं जिन्हें अलग-अलग विद्वानों ने कालिदास द्वारा रचित सिद्ध करने का प्रयास किया है।<ref>उमाशंकर शर्मा 'ऋषि', संस्कृत साहित्य का इतिहास, चौखम्भा भारती अकादमी, पृष्ठ १९९ </ref> इनमें से मात्र सात ही ऐसी हैं जो निर्विवाद रूप से कालिदासकृत मानि जाती हैं: तीन नाटक(रूपक): [[अभिज्ञानशाकुन्तलम्|अभिज्ञान शाकुन्तलम्]], [[विक्रमोर्वशीयम्]] और [[मालविकाग्निमित्रम्]]; दो महाकाव्य: [[रघुवंशम्]] और [[कुमारसंभवम्]]; और दो खण्डकाव्य: [[मेघदूतम्]] और [[ऋतुसंहार]]। इनमें भी ऋतुसंहार को प्रो॰ कीथ संदेह के साथ कालिदास की रचना स्वीकार करते हैं।<ref>ए बी कीथ, संस्कृत साहित्य का इतिहास, चौखम्भा भारती अकादमी, पृष्ठ</ref>
=== नाटक ===
'''[[मालविकाग्निमित्रम्]]''' कालिदास की पहली रचना है, जिसमें राजा अग्निमित्र की कहानी है। अग्निमित्र एक निर्वासित नौकर की बेटी मालविका के चित्र से प्रेम करने लगता है। जब अग्निमित्र की पत्नी को इस बात का पता चलता है तो वह मालविका को जेल में डलवा देती है। मगर संयोग से मालविका राजकुमारी साबित होती है और उसके प्रेम-संबंध को स्वीकार कर लिया जाता है।
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