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# आत्मपुराण
 
इन ग्रन्थों के नाम किसी प्राचीन सूची में नहीं मिलता है और इनके पौराणिक ग्रंथ होने पर भी संदेह व्यक्त किया गया है। 'नीलमतपुराणम्' के पुराण होने या न होने के सन्दर्भ में स्वयं इसके संपादक ने जोर देकर कहा है कि 'नीलमतम्' पुराणों की श्रेणी में नहीं आता है। (Strictly speaking, the Nilamatam does not come under the category of The Puranas.)<ref>Nilamatapuranam (Sanskrit text with the index of verses), edited by Ramlal and Pandit jagaddhar, Motilal Banarsidas, Lahore, edition-1924. p. 4 (introduction).</ref> इसी प्रकार 'आत्म पुराण' के बारे में भी कहा गया है कि "आत्मपुराण परम्परागत महापुराणों, उपपुराणों आदि से कुछ भिन्न है। इसी कारण महापुराणों या उपपुराणों की सूची में इसका उल्लेख प्राप्त नहीं होता, यह काफी बाद में तेरहवीं शताब्दी में लिखा गया है।"<ref>संस्कृत वाङ्मय का बृहद् इतिहास, त्रयोदश खण्ड (पुराण), पूर्ववत्, पृष्ठ-७९३.</ref>
 
==इन्हें भी देखें==