"चौपाई" के अवतरणों में अंतर

14 बैट्स् नीकाले गए ,  1 वर्ष पहले
Shelves are empty (वार्ता) द्वारा किए बदलाव 4227439 को पूर्ववत किया
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
(Shelves are empty (वार्ता) द्वारा किए बदलाव 4227439 को पूर्ववत किया)
टैग: किए हुए कार्य को पूर्ववत करना
{{speedy|V2}}
चौपाई मात्रिक सम छन्द का एक भेद है। प्राकृत तथा अपभ्रंश के १६ मात्रा के वर्णनात्मक छन्दों के आधार पर विकसित हिन्दी का सर्वप्रिय और अपना छन्द है।<ref>{{cite book |last= |first= |title= हिन्दी साहित्य कोश, भाग- १|year=१९८५|publisher=ज्ञानमण्डल लिमिटेड|location=वाराणसी |id= |page=२४८ |accessday= |accessmonth= |accessyear= }}</ref>
गोस्वामी तुलसीदास ने [[रामचरित मानस]] में चौपाइ छन्द का बहुत अच्छा निर्वाह किया है। चौपाई में चार चरण होते हैं, प्रत्येक चरण में १६-१६ मात्राएँ होती हैं तथा अन्त में गुरु होता है।