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{{main|हिमाचल प्रदेश का भूगोल}}
 
हिमाचल प्रदेश [[हिमालय]] पर्वत की [[शिवालिक]] श्रेणी का हिस्सा है। शिवालिक पर्वत श्रेणी से ही [[घग्गर]] नदी निकलती है। राज्य की अन्य प्रमुख नदियों में [[सतलुज]] और [[व्यास]] शामिल है। हिमाचल [[हिमालय]] का सुदूर उत्तरी भाग [[लद्दाख]] के ठंडे मरुस्थल का विस्तारविस्ता है और लाहौल एवं स्पिति जिले के स्पिति उपमंडल में है। हिमालय की तीनों मुख्य पर्वत श्रंखलाएँ, बृहत हिमालय, लघु हिमालय; जिन्हें हिमाचल में [[धौलाधार]] और [[उत्तरांचल]] में नागतीभा कहा जाता है और उत्तर-दक्षिण दिशा में फैली [[शिवालिक]] श्रेणी, इस हिमालय खंड में स्थित हैं। लघु हिमालय में 1000 से 2000 मीटर ऊँचाई वाले पर्वत ब्रिटिश प्रशासन के लिए मुख्य आकर्षण केंद्र रहे हैं।
 
=== नदियां ===
 
'''चिनाव नदीः''' चिनाव नदी [[जम्मू]]<nowiki/>-कश्मीर से होती हुई पंजाब राज्य में बहने वाली नदी है। पानी के घनत्व की दृष्टि से यह प्रदेश की सबसे बड़ी नदी है। यह नदी समुद्र तल से लगभग 4900 मीटर की ऊंचाई पर बारालाचा दर्रे (लाहौल स्पीति) के पास से निकलने वाली चन्द्रा और भागा नदियों के तांदी नामक स्थान पर मिलने से बनती है। इस नदी को वैदिक साहित्य में ‘अश्विनी’ नाम से संबोधित किया गया है। ऊपरी हिमालय पर टांडी में ‘चन्द्र’ और ‘भागा’ नदियां मिलती हैं, जो चिनाव नदी कहलाती है। महाभारत काल में इस नदी का नाम ‘चंद्रभागा’ भी प्रचलित हो गया था। ग्रीक लेखकों ने चिनाव नदी को ‘अकेसिनीज’ लिखा है, जो अश्विनी का ही स्पष्ट रूपांतरण है। चंद्रभागा नदी [[मानसरोवर]] (तिब्ब्त) के निकट [[चंद्रभागा]] नामक पर्वत से निस्तृत होती है और सिंधु नदी में गिर जाती है। चिनाव नदी की ऊपरी धारा को चद्रभागा कहकर, पुःन शेष नदी का प्राचीन नाम अश्विनी कहा गया है। इस नदी को हिमाचल से अदभुत माना गया है। इस नदी का तटवर्ती प्रदेश पूर्व गुप्त काल में म्लेच्छों तथा यवन शव आदि द्वारा शासित था।
 
 
== जलवायु ==
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