"चितरंजन दास" के अवतरणों में अंतर

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जिस वक्त देशबंधु चितरंजन दास का राजनैतिक जीवन चरम पर था, उसी वक्त काम के बोझ तले उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया। मई 1925 में वो स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए दार्जिलिंग चले गए, लेकिन उनका स्वास्थ्य बिगड़ता ही चला गया। इस बीच [[महात्मा गांधी]] भी खुद उनसे मिलने दार्जिलिंग आए थे। 16 जून 1925 को को तेज बुखार के कारण उनका निधन हो गया।
 
चितरंजन दास की अंतिम यात्रा कोलकाता में निकाली गई, जिसका नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया। गांधी जी ने कहा, ”देशबंधु एक महान आत्मा थे। उन्होंने एक ही सपना देखा था… आजाद भारत का सपना… उनके दिनदिल में हिंदू और मुसलमानों के बीच कोई अंतर नहीं था।”
 
देशबन्धु चितरंजन दास के निधन पर विश्वकवि [[रवीन्द्रनाथ ठाकुर]] ने लिखा-