"संत मत": अवतरणों में अंतर

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== व्युत्पत्ति ==
 
'संत मत' का अर्थ है - 'संतों का मार्ग', 'सत्य का मार्ग', 'सही और आशावादी पथ' या 'संतों की राय'. 'संत' शब्द संस्कृत की धातु 'सद्' से बना है और कई प्रकार से प्रयोग हआ है (सत्य, वास्तविक, ईमानदार, सही). इसका मूल अर्थ है 'सत्य जानने वाला' या 'जिसने अंतिम सत्य अनुभव कर लिया हो। ' 'संत' शब्द से अर्थ आम तौर पर एक अच्छे व्यक्ति से लिया जाता है लेकिन इसका विशेष अर्थ मध्यकालीन भारत के संत कवियों से ही लिया जाता है।<ref name="शोमर">शोमर, करीने, ''संत मत:स्टडीज़ इन ए डिवोशनल ट्रेडीशंस ऑफ इंडिया'' में ''द संत ट्रेडीशन इन पर्सपेक्टिव'', शोमर के. और मैक ल्योड डब्ल्यू.एच. (Eds.)ISBN 0-9612208-0-5</ref> sant vhi h jo shadhna krta ho god milne ke liye her time koshish krta rhe ya une yad krta rhe us sant khte h
संत वह है जो सृष्टिकर्ता सत्यस्वरूप प्रभु-परमात्मा को जानकर मन-वचन-कर्म से स्वयं सत्यनिष्ठ हो एवं परोपकार की निस्स्वार्थ भावना से सभी मनुष्यों को सत्य से जोड़ने की उच्च भावना से आजीवन प्रयत्नशील रहता है । सन्तहृदय की यही सर्वकल्याणकारी भावधारा ही संतमत कहलाती है।
' संतन के मन रहत है सबके हित की बात ।
घट घट देखें अलख को पूछें जात न पात ।। '
 
== संत ==
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