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== इतिहास ==
प्रागैतिहासिक काल से लेकर एक देश के रूप में अस्तित्व में आने तक स्पेन का राज्यक्षेत्र अपनी खास अवस्थिति की वजह से, कई बाहरी प्रभावों के अधीन रहा था। रोमन काल में यह हिस्पानिया राज्य था। रोमन प्रभाव सीमित होने के बाद विसिगोथिक राज्य बने। सन् 711 में अफ़्रीक़ा के मूर शासक तारीक बिन जियाद ने विसिगोथिकों की आपसी लड़ाई का फ़यदा उठाकर आक्रमण किया और जीत हासिल की। इसके बाद यहाँ सीरिया से निष्कासित उमय्यद ख़िलाफत की पीठ बनी। मुस्लिमों का शासन पूरे स्पेन (अल-अंदलूस) पर रहा - लेकिन उत्तर तथा उत्तर पूर्व में दो छोटे स्वतंत्र राज्य भी रहे। दसवीं सदी में [[कोर्दोबा]] स्थित साम्राज्य में मुस्लमान, ईसाइयों और यहूदियों के साथ मिलकर एक बहुआयामी संस्कृति का हिस्सा थे। दसवीं सदी में मुस्लमानों को ईसाइयों ने हरानानेहराना आरंभ किया। इसके बाद ईसाइयों ने जेरुशलम से मुसलमानों का कब्ज़ा बटाने के लिए धर्मयुद्धों में भाग लिया। पोप के आग्रह पर सैनिक तुर्की होते हुए जेरुशलम पहुँचने लगे। इस समय तुर्की पर मुस्लिम तुर्कों का शासन आरंभ हो गया था जिसकी वजह से ईसाई यूरोपियों का उनके पवित्र धार्मिक स्थल जेरुशलम पहुँचना मुश्किल हो गया था। शुरुआत में तो ईसाई सफल रहे पर सन् 1180 के दशक में मामलुक सेनापति सलादीन के प्रयास के बाद यूरोप के सैनिक हारते गए। इसके साथ ही पूर्व से मसालों, रेशम और कीमती आभूषणों के मार्ग पर भी मुस्लमानों का कब्ज़ा हो गया। इन चीजों के यूरोप में भाव बढ़ते गए और इन कारणों से मुस्लमानों के खिलाफ रोष भी।
=== खोजी युग ===
पंद्रहवीं सदी में पुर्तगाल के राजकुमार हेनरी और अन्य ने अफ्रीका के स्युटा और [[मोरक्को]] पर आक्रमण किया और सफल हुए। इसके बाद पश्चिम अफ्रीका के तटों पर भी नौअन्वेषण चलते रहे। हेनरी और उसकी नौसमूह [[सेनेगल नदी]] के मुहाने तक पहुंच गया जो इस समय एक बड़ी उपलब्धि थी - क्योंकि इस जगह को दुनिया का अंत समझा जाता था। कई ऐसी यात्राओं के बाद यूरोप में लोगों का दुनिया के बारे में विश्वास बदलने लगा। पुर्तगाल के राजा और हेनरी के भाई-भतीजों ने कई नौअन्वेषी अभियान चलाए . सन् 1492 में [[मार्को पोलो]] की यात्रा-वृत्तांत से प्रभावित होकर पूरब जाने के लिए पश्चिम की यात्रा पर निकला - यह साबित करने कि दुनिया गोल है। वो वेस्ट-इंडीज़ तक पहुँचा। इसके बाद 1498 में वास्को द गामा, अपने कई पूर्वर्तियों के बनाए नक्शे और किले का सहारा लेकर उत्तमाशा अंतरूप और फिर भारत तक पहुँच गया।
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