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[[यमुना नदी|यमुना]] राज्य की एकमात्र चिरस्थायी नदी है, जो इसकी पूर्वी सीमा पर बहती है। उत्तरी हरियाणा में उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर बहने वाली कई बरसाती नदियां हैं, जो हिमालय की [[शिवालिक पहाड़ियाँ|शिवालिक पहाड़ियों]] से निकलती हैं। इनमें [[घग्गर-हकरा नदी|घग्गर-हकरा]], [[चौटांग नदी|चौटांग]], [[टांगरी नदी|टांगरी]], [[कौशल्या नदी|कौशल्या]], [[मारकंडा नदी|मारकंडा]], [[ सरस्वती नदी|सरस्वती]] और [[सोम नदी|सोम]] इत्यादि प्रमुख हैं। इसी तरह दक्षिणी हरियाणा में भी [[अरावली पर्वत|अरावली पहाड़ियों]] से निकलने वाली कई नदियां दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर बहती हैं। इन नदियों में [[साहिबी नदी|साहिबी]], [[दोहान नदी|दोहान]], [[कृष्णावती नदी|कृष्णावती]] और [[इंदौरी नदी|इंदौरी]] शामिल हैं। माना जाता है कि ये सभी किसी समय [[सरस्वती नदी]] की सहायक नदियां थीं। इन नदियों पर राज्य भर में कई बाँध बने हैं, जिनमें यमुना नदी पर बने [[हथिनीकुंड बैराज|हथिनीकुंड]] तथा [[ताजेवाला बैराज|ताजेवाला]] बैराज, [[पंचकुला जिला|पंचकुला ज़िले]] में स्थित [[कौशल्या बाँध]], [[यमुनानगर जिला|यमुनानगर ज़िले]] में स्थित [[पथराला बैराज]] तथा [[सिरसा जिला|सिरसा ज़िले]] में स्थित [[ओटू बैराज]] मुख्य हैं।
 
हरियाणा की प्रमुख झीलों में [[गुरुग्राम]] का बसई वेटलैंड, [[फरीदाबाद]] की [[बड़खल झील]] और प्राचीन [[सूरजकुण्ड]], [[कुरुक्षेत्र]] के [[सन्निहित सरोवर|सन्निहित]] और [[ब्रह्मसरोवर|ब्रह्म सरोवर]], [[हिसार]] की ब्लू बर्ड झील, सोहना की दमदामा झील, [[यमुनानगर जिला|यमुनानगर जिले]] का हथनी कुंड, [[करनाल]] की [[कर्ण झील]], और [[रोहतक]] की [[तिल्यार झील]] इत्यादि प्रमुख हैं। सिंचाई के लिए जल की व्यवस्था हेतु राज्य भर में नहरों का जाल बिछा है, जिनमें पश्चिमी यमुना नहर, [[इंदिरा गांधी नहर]] और प्रस्तावित [[सतलज यमुना लिंक नहर]] मुख्य हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आने वाले लगभग १४,००० जोहड़ों और ६० झीलों का प्रबंधन हरियाणा राज्य वाटरबॉडी प्रबंधन बोर्ड हरियाणा के जिम्मे है। ''राज्य का एकमात्र [[गरम चश्मा]] सोहना में स्थित है।''
 
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