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मेरा रँग दे बसन्ती चोला....<br />
 
== सरफरोशीसरफ़रोशी की तमन्ना ==
[[राम प्रसाद 'बिस्मिल']] बिस्मिल अज़ीमाबादी की यह गज़ल<ref>सरफरोशी की तमन्ना (खण्ड-दो) पृष्ठ-६४)</ref> क्रान्तिकारी जेल से पुलिस की लारी में अदालत जाते हुए, अदालत में मजिस्ट्रेट को चिढाते हुए व अदालत से लौटकर वापस जेल आते हुए कोरस के रूप में गाया करते थे। बिस्मिल के बलिदान के बाद तो यह रचना सभी क्रान्तिकारियों का मन्त्र बन गयी<ref>आशारानी व्होरा स्वाधीनता सेनानी लेखक-पत्रकार पृष्ठ-१८</ref>। जितनी रचना यहाँ दी जा रही है वे लोग उतनी ही गाते थे।