"अमेरिकी गृहयुद्ध" के अवतरणों में अंतर

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== परिचय ==
यह कहना सर्वथा उचित न होगा कि यह [[युद्ध]] केवल [[दास प्रथा]] को लेकर हुआ। वास्तव में इस संघर्ष का बीज बहुत पहले बोया जा चुका था और यह विभिन्न विचारधाराओं में पारस्परिक विरोध का परिणाम था। उत्तर के निवासी भौगोलिक परिस्थिति, यातायात के साधन तथा औद्योगिक सफलता के फलस्वरूप अधिक संतुष्ट तथा संपन्न थे। कृषि-प्रधान दक्षिणी राज्यों में 17वीं१७वीं और 18वीं१८वीं शताब्दियों में [[अफ़्रीका]] से बहुत से अफ़्रीकी दास यहाँ लाए गए थे और वे ही [[कृषि]] में मज़दूरी करते थे। इसलिए दक्षिणी राज्य इन हबशी दासों को मुक्त नहीं करना चाहते थे। [[संयुक्त राज्य अमेरिका|अमेरिका]] के सभी उत्तरी राज्यों ने 1804१८०४ तक दासप्रथा को धीरे-धीरे ख़त्म कर देने के लिए [[क़ानून]] बना लिए थे। मशीन युग के आने ने उत्तर और दक्षिण के बीच की खाई बढ़ा दी। उत्तरी निवासी मशीन के प्रयोग से आर्थिक क्षेत्र में प्रगति करने लगी। उनका [[कोयले]] और [[लोहे]] का उत्पादन बढ़ा और वहाँ बहुत से कारखाने काम करने लगे। वहाँ की जनसंख्या भी तेजी से बढ़ने लगी। दक्षिणी राज्यों के लोग अभी केवल कृषि पर आधारित थे और उन्होंने युग के साथ प्रगति नहीं की। यहाँ की जनसंख्या भी अधिक तेजी से नहीं बढ़ी। अमेरिका की व्यापारिक नीति उत्तरी राज्यों के लिए लाभदायक थी पर दक्षिणवाले उससे लाभ नहीं उठा सकते थे। व्यापारिक नीति का दक्षिण में विरोध हुआ और दक्षिणी इसे अवैध ठहराने लगे। वे स्वतंत्र व्यापार के अनुयायी थे, जिससे वे अपना कच्चा माल बिना नियंत्रण के विदेश भेज सकें और अपने आवश्यकतानुसार बनी हुई चीजें खरीदें। [[दक्षिण कैरोलाइना]] ने जान कूल्हन के मतानुसार प्रत्येक राज्य को संयुक्त राज्य की किसी भी नीति को मानने या न मानने का पूर्ण अधिकार था। संघर्ष बढ़ा। संविधान की आड़ में उत्तर और दक्षिण के राज्य अपने-अपने मत की पुष्टि का पूर्णतया प्रयास करने लगे।<ref name="ref79foxad">[http://books.google.com/books?id=HEo0cy0otgoC The American Civil War and the British press], Alfred Grant, McFarland, 2000, ISBN 978-0-7864-0630-2, ''... the wish of the South for low duties and unfettered trade. Of course we are anxious that the prosperity of the States which produce so much raw material and need so many manufactured goods should suffer no interruption or reverse ...''</ref>
 
== टेक्सास की समस्या ==
व्यापारिक नियंत्रण के अतिरिक्त दासप्रथा को लेकर यह विरोध और बढ़ा। [[ऐंड्रयू जैकसन]] के समय दासप्रथा के विरोध में किया गया उत्तरी राज्यों में प्रदर्शन और दक्षिणी राज्यों में इसको कायम रखने का प्रयास [[गृहयुद्ध]] का दूसरा मूल कारण हुआ। दक्षिणी कहने लगे कि [[टेक्सास]] पर अधिकार और [[मेक्सिको]] से युद्ध करना अनिवार्य है। वे सेनेट में बराबरी की संख्या कायम रखना चाहते थे। 1844१८४४ ई. में [[मसाच्यूसेट्स]] की धारासभा ने यह प्रस्ताव पारित किया कि संयुक्त राष्ट्र का संविधान अपरविर्तनीय है और टेक्सास पर अधिकार अमान्य है। दक्षिणियों ने और जोर से कहा कि यदि दासप्रथा बंद की गई तो वे संयुक्त राज्य से अलग हो जाएँगे। दासप्रथा का प्रश्न राजनीतिक क्षेत्र के अतिरिक्त अब धार्मिक क्षेत्र में भी घुस आया। इसको लेकर मेथडिस्ट चर्च में भी उत्तरी और दक्षिणी दो दल हो गए। दोनों ने धार्मिक संस्थाओं को अपनी ओर खींचा। यद्यपि विग और डेमोक्रैट दलों ने 1848१८४८ ई. के राष्ट्रपति के चुनाव में इस समस्या को अलग रखना चाहा, तथापि इस चुनाव ने जनता को दो भागों में बाँट दिया जो मूलत: भौगोलिक आधार पर बँटी थी।
 
संघर्ष और भी घना होता गया। मेक्सिकों से युद्ध में प्राप्त भूमि में दासप्रथा को रखने अथवा हटाने का प्रश्न जटिल था। दक्षिणवाले इसे रखना चाहते थे। क्योंकि यह उनके क्षेत्र में था, पर उत्तर के निवासी सिद्धांत रूप से दासप्रथा के पूर्ण विरोधी थे और नए स्थान में इसे रखने को तैयार न थे। उत्तरी राज्यों की धारासभओं ने इसका विरोध किया, पर इसके विपरीत दक्षिण में दासप्रथा के समर्थन में सार्वजनिक सभाएँ हुई। [[वर्जिनिया]] की धारासभा ने उत्तरी राज्यों की सभा में पारित किए गए प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया और वहाँ की जनता ने संयुक्त राज्य से लोहा लेने का दृढ़ निश्चय कर लिया। 1850१८५० ई. में एक समझौता हुआ जिसके अंतर्गत [[कैलिफोर्निया]] स्वंतत्र राज्य के रूप में संयुक्त राज्य में शामिल हो गया और कोलंबिया में दासप्रथा हटा दी गई। [[टेक्सास]] को एक करोड़ डालर दिए गए और भागे हुए दासों को वापस करने का एक नया कानून पारित हुआ। इसका पालन नहीं हुआ। उत्तर के राज्य भागे हुए बदमाशों को उनके मालिकों के पास नहीं लौटाते थे। इससे परिस्थिति गंभीर हो गई। प्रसिद्ध ड्रेडस्काट वाद में न्यायाधीश टानी ने बहुमत से निर्णय किया कि विधान के अंतर्गत न तो राष्ट्रीय संसद् (सेनेट) और न किसी राज्य की धारासभा किसी क्षेत्र से दासप्रथा को हटा सकती है। इसके ठीक विपरीत [[अब्राहम लिंकन|लिंकन]] ने कहा कि कोई भी राज्य अपनी सीमा के अंदर दासप्रथा को हटा सकता हैं। इन प्रश्नों को लेकर राजनीतिक दलों में आंतरिक विरोध हो गया। 1860१८६० ई. में लिंकन राष्ट्रपति चुन लिए गए। लिंकन का कहना था कि यदि किसी घर में फूट है तो वह घर अधिक दिन नहीं चल सकता। इस संयुक्त राज्य को आधे स्वतंत्र और आधे दासों में नहीं बाँटा जा सकता। राष्ट्रपति के चुनाव की घोषणा के बाद दक्षिण कैरोलाइना ने एक सम्मेलन बुलाया जिसमें संयुक्त राज्य से अलग होने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। 1861ई१८६१ ई. के फरवरी तक जार्जिया, [[फ्लोरिडा]], [[अलाबामा]], [[मिसीसिपी]], [[लूइसियाना]] और टेक्सास ने इस नीति का पालन किया। इस प्रकार नवंबर, 1860१८६० ई. से मार्च, 1861ई१८६१ ई. तक, वाशिंगटन में केंद्रीय शासन शिथिल हो गया। 1861ई१८६१ ई. के फरवरी मास में वाशिंटन में शांतिसंमेलन हुआ, किंतु थोड़े समय बाद, 12१२ अप्रैल 1861१८६१ ई. को अनुसंघीय राज्यों की तोपों ने चाल्र्स्टन बंदरगाह की शांति भंग कर दी। यहाँ प्रदर्शित फोर्ट सुमटर पर गोलाबारी करके "कानफ़ेडरेता" ने गृहयुद्ध छेड़ दिया।
 
== गृहयुद्ध ==
युद्ध के मोर्चे मुख्यत: तीन थे - समुद्र, [[मिसिसिप्पी नदी|मिसिसिप्पी]] घाटी और पूर्व समुद्रतट के राज्य। युद्ध के आरंभ में प्राय: समग्र जलसेना संयुक्त राज्य के हाथ में थी, किंतु वह बिखरी हुई और निर्बल थी। दक्षिणी तट की घेराबंदी से यूरोप को रुई का निर्यात और वहाँ से बारूद, वस्त्र और औषधि आदि दक्षिण के लिए अत्यंत आवश्यक आयात की चीजें पूर्णतया रुक गई। संयुक्त राज्य के बेड़े ने दक्षिण के सबसे बड़े नगर [[न्यू ओर्लियंस]] से आत्मसमर्पण करा लिया। मिसिसिप्पी की घाटी में भी संयुक्त राज्य की सेना की अनेक जीतें हुई। वर्जिनिया कानफेडरेतों को बराबर सफलताएँ मिलीं। 1863ई१८६३ ई. में युद्ध का आरंभ उत्तर के लिए अच्छा नहीं हुआ, पर जुलाई में युद्ध की बाजी पलट गई। 1864ई१८६४ ई. में युद्ध का अंत स्पष्ट दीखने लगा। 17१७ फ़रवरी को कानफेडरेतों ने दक्षिण कैरोलाइना की राजधानी कोलंबिया को खाली कर दिया। चाल्र्स्टन संयुक्त राज्य के हाथ आ गया। दक्षिण के निर्विवाद नेता राबर्ट ई. ली द्वारा आत्मसमर्पण किए जाने पर 13 १३ अप्रैल को वाशिंटन में उत्सव मनाया गया। गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद दक्षिणी राज्यों के प्रति कठोरता की नीति नहीं अपनाई गई, वरन् कांग्रेस ने संविधान में 13वाँ १३वाँ संशोधन प्रस्तुत करके दासों की स्वतंत्रता पर कानूनी छाप लगा दी।
 
== गृहयुद्ध के कारण ==
अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के पश्चात अमेरिका एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में विश्व के मानचित्र पर स्थापित हुआ और उसने विश्व का पहला लिखित संविधान बनाकर संघीय शासन प्रणाली की स्थाना की। इस स्वतंत्रता संग्राम में सभी अमेरिकी राज्यों ने एकजुट होकर उपनिवेशवाद के विरूद्ध संघर्ष किया था किन्तु 1860१८६० के दशक में अमेरिकी राज्यों के बीच ही गृह-युद्ध छिड़ गया।
 
कुछ इतिहासकारों का मानना है कि अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में ही गृहयुद्ध के बीज निहित थे तो कुछ गृहयुद्ध को पूंजीवादी आदोलन मानते है तथा कुछ इतिहासकारों ने दास प्रथा को गृहयुद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
 
=== दासप्रथा से जुड़े संवैधानिक मुद्दे ===
उत्तरी-अमेरिका में तो दास व्यापार समाप्त कर दिया गया था और दास प्रथा उत्तर में पेन्सिलवेनिया की दक्षिणी सीमा तक बंद हो गई थी। इस सीमा रेखा को “मेसम-डिक्सन” सीमा कहा जाता था। अब अमेरिका का पश्चिमी क्षेत्रों में विस्तार हो रहा था और नए-नए क्षेत्र संयुक्त राज्य अमेरिका में शामिल किए जा रहे थे। ऐसे में यह प्रश्न उठ खड़ा हुआ कि इन राज्यों को दास राज्य के रूप में या स्वतंत्र राज्य के रूप में शामिल किया जाए। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि संविधान में यह स्वीकार किया गया था कि संघीय व्यवस्थापिका में दासों की गणना भी होती थी किन्तु दासों की जनसंख्या को 3/5 के औसत में प्रतिनिधित्व दिया जाता था अर्थात् दासों की जनसंख्या यदि 500 होगी तो उसे 300 मानकर प्रतिनिधित्व दिया जाने लगा। इस तरह दास राज्यों की संख्या में वृद्धि हो जाने से व्यवस्थापिका में दास राज्यों का वर्चस्व बढ़ जाने का खतरा था। इसलिए नवीन राज्यों के विलय के संदर्भ में उत्तरी अमेरिका उसे स्वतंत्र राज्य के रूप में शामिल करना चाहता था जबकि दक्षिणी राज्य उसे दास राज्य के रूप में। यह विवाद मिसौरी राज्य के विलय को लेकर और भी गहरा गया। अतः 1820१८२० ई. में [[हेनरी क्ले]] (प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष) की मध्यस्थता से मिसौरी-समझौता संपन्न हुआ। इसके तहत् मिसौरी के दास राज्य के रूप में (दास प्रथा को हटान बिना ही) संघ में सम्मिलित कर लिया गया और यह कहा गया कि 36<sup>0</sup>30' अक्षांश के उत्तर वाले क्षेत्र लुइसियाना में दास प्रथा जारी नहीं रहेगी। इसके बाद संघ में टेक्सास के विलय का प्रस्ताव आया। अंत में टेक्सास दास राज्य के रूप में संघ में 1845१८४५ में शामिल हो गया। फिर कैलिफोर्निया के मुद्दे पर विवाद हुआ और अंततः कैलिफोर्निया को 1850१८५० में स्वतंत्र राज्य के रूप में सम्मिलित किया गया। दक्षिणी राज्यों में इस पर उग्र विरोध जताया। अब उन्हें संतुष्ट करने के लिए एक “भगोड़ा दास” कानून (Fugitive slave law) लाया गया जिसके तहत् भागे हुए दास को पुनः पकड़ा जा सकता था। इस कानून का उत्तरी राज्यों ने विरोधी किया क्योंकि वे भगोड़े दासों को शरण देते थे। किन्तु 1854१८५४ में [[कैन्सस]] एवं [[नेब्रास्का]] के विलय के प्रश्न ने विवाद को और गहरा दिया। वस्तुतः ये दोनों राज्य 36 डिग्री 30 मिनट के उत्तर में स्थित थे ओर मिसौरी समझौते के अनुसार इन्हें स्वतंत्र राज्य के रूप में सम्मिलित किया जाना था किन्तु [[स्टीफन डगलस]] नामक राजनीतिज्ञ के प्रयास से इन राज्यों को दास राज्य के रूप में शामिल कर लिया गया। इस तरह राज्यों के विलय के प्रश्न ने उत्तरी एवं दक्षिणी राज्यों के मध्य खाई को और चौड़ा कर दिया।
 
=== अब्राहम लिंकन का निर्वाचन ===
1860१८६० ई. में रिपब्लिकन उम्मीदवार [[अब्राहम लिंकन]] की विजय हुई और 1861१८६१ में राष्ट्रपति के पद पर आसीन हुआ। रिपब्लिकन पार्टी ने [[दास प्रथा]] की आलोचना की थी और यह पार्टी स्वतंत्र श्रम विचारधारा में विश्वास रखती थी। अतः लिंकन की जीत दक्षिण के राज्यों को अशुभ सूचक प्रतीत हुई। उन्हें लगा कि यह जीत दक्षिण के आर्थिक हितों के अनुकूल नहीं है। अतः दक्षिण के राज्यों में पहली प्रतिक्रिया कैरोलिना राज्य द्वारा की गयी और उसने संघ से अलग होने की घोषणा कर दी। फरवरी, 1861१८६१ तक मिसीसिपी, फ्लोरिडा, अलबामा, जॉर्जिया, लुलसियाना व टेक्सास ने भी संघ से विच्छेद कर जेफरसन डेविस को अपना राष्ट्रपति नियुक्त किया और इसी के साथ गृहयुद्ध की शुरूआत हो गई, जब दक्षिणी कैरोलिना से सुम्टर के किले पर बम फेंक संघ के विरूद्ध युद्ध छेड़ दिया।
 
== गृहयुद्ध के दौरान लिंकन की भूमिका ==
दक्षिणी राज्यों द्वारा संघ से अलग हो जाने के कारण एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न खड़ा हो गया कि क्या दक्षिणी राज्याें को संघ से अलग होने का अधिकार है? लिंकन ने राष्ट्रपति पद पर निर्वाचन के पश्चात् स्पष्ट रूप से घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका के रूप में जो संघ स्थापित किया गया था वह अखंडनीय और शाश्वत् है, उसकी अखंडनीयता को किसी प्रकार नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। अमेरिकी संविधान निर्माताओं ने किसी राज्य को संघ से पृथक होने का अधिकार नहीं दिया है। लिंकन ने घोषित किया कि "अगर हम सभी दासों को मुक्त कर संघ को बचा सके तो हम ऐसा करेंगे अगर हम दासों को मुक्त किए बिना संघ को बचा सके तो हम ऐसा करेंगे और अगर कुछ दासों को मुक्त कर तथा कुछ अन्य को मुक्त नहीं करके संघ को बचा सके तो हम वह भी करेंगे।" इस तरह लिंकन ने संघ को बचाए रखने का प्रयास किया। युद्ध के दौरान उसने कूटनीतिक कुशलता के जरिए दक्षिणी राज्यों का विदेशों से संबंध बनने नहीं दिया। उसने सेनाओं को संगठित कर दक्षिण के सशस्त्र संघर्ष की चुनौती को तोड़ा। प्रारंभ से ही उसने सेनाओं का मुख्य लक्ष्य दक्षिणी प्रदेश पर अधिकार करना नहीं वरन् परिसंघ की सेनाओं का विस्तार करना बताया। 1861१८६१ ई. में लिंकन ने दास व्यवस्था का उन्मूलन कर दिया और उन्हें राष्ट्रीय सेनाओं में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया। किन्तु इसका उद्देश्य दक्षिणी राज्यों को नष्ट करना नहीं वरन् संघ को बनाए रखना ही था। उसका मानना था कि दासों की स्वतंत्रता की घोषणा से दक्षिण के राज्यों में दासों का विद्रोह होगा और युद्ध में उन्हें दासों की सहायता नहीं मिल पाएगी। अंततः लिंकन के प्रयासों एवं कुटनीति कुशलता के जरिए उत्तरी राज्यों की जीत हुई ओर इसी के साथ 1865१८६५ ई. में गृहयुद्ध समाप्त हो गया। लिंकन ने अमेरिका का यथार्थ रूप में संयुक्त राष्ट्रीय निर्माण किया। दासता का उन्मूलन कर समाज को नवज्योति दी तथा अमेरिकी राजनीतिक तंत्र को मजबूत बनाया। परन्तु गृहयुद्ध के पश्चात अमरीका को वह आगे नहीं बढ़ा सका क्याेंकि 15१५ अपै्रल 1865१८६५ को जॉन विस्कस बूथ द्वारा उसकी हत्या कर दी गई।
 
== गृहयुद्ध का परिणाम एवं प्रभाव ==
 
* दास प्रथा की समाप्ति से दक्षिणी राज्यों में बागानी कृषि का महत्व जाता रहा जिससे बागान मालिकों की स्थिति कमजोर हुई और दक्षिण में उत्तरी पूंजी का निवेश और प्रसार हुआ और वहाँ भी औद्योगीकरण हुआ।
* 1864 १८६४ ई. राष्ट्रीय बैकिंग अधिनियम पारित होने के बाद देश में पहली बार राष्ट्रीय मुद्रा का प्रचलन शुरू हुआ। इसी प्रकार युद्ध के पश्चात् पूरे अमेरिका में आधुनिक संचार सुविधाओं का जाल बिछ गया। टेलीग्राफ लाइन, टेलिविजन तथा पार महाद्वीपीय रेलमार्ग का निर्माण किया गया। परिवहन और संचार की सुविधाएं उपलब्ध हो जाने से बाजार व्यवस्था में विस्तार हुआ। बाजार का यही विस्तार युद्धोत्तर अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अभिलक्षण माना जाता है।
* कृषि के क्षेत्र में मनुष्य और मजदूरों पर आश्रितता कम होने के साथ-साथ मशीनों का प्रयोग बढ़ता गया। फलतः उत्पादन में वृद्धि होती गई। अब हाथ की खेती यंत्रों की खेती में बदल गई। अब खेती के काम में कई उम्दा किस्म के औजार जैसे थे्रसर, भांप के इंजन से चलने वाला कर्बाइन हार्वेस्टर आदि उपयोग में आने लगे थे। युद्धकालीन वित्त व्यवस्था से अमेरिकी पूंजीपतियों को बहुत लाभ हुआ। युद्धकाल में फैली मुद्रास्फीति से तथा संघ सरकार की ओर से पर्याप्त ऋण की व्यवस्था किए जाने से मजदूरी ओर वेतन से हुई आय उद्यमियों के हाथों में पहुंच गई। रेलमार्गों का निर्माण हो जाने से निर्मित माल और भारी उद्योगों के उत्पादनों को प्रोत्साहन मिला। कोयले और लोहे के विभिन्न भंडारों की खोज और खनन हुआ। इन सबसे अमेरिका में बड़े पैमाने वाले उद्योगों का जाल बिछ गया और इस तरह तैयार माल के लागत खर्च में कमी आई। इस तरह बड़े उद्योग अमेरिका की पहचान बन गए। इस्पात उद्योग, कोयला, मांस उद्योग का विकास हुआ। नगरों की संख्या बढ़ी तथा वाणिज्य व्यापार का विकास हुआ। 1900 के आसपास अकेले अमेरिका में इतने इस्पात का उत्पादन होने लगा जितना उसके दो अन्य प्रतिद्वन्द्वी इंग्लैंड और जर्मनी मिलकर कर रहे थे।
* इस युग में अमेरिका में नवआर्थिक युग का सूत्रपात हुआ। कृषि और औद्योगिक समृद्धि से अमेरिका पूंजीवाद की ओर अग्रसर हुआ। 19वीं१९वीं शताब्दी में अंतिम दो दशकों में विलयन और समेकन (Merger and Acquisition) की प्रक्रिया शुरू हुई अर्थात् कई छोटे-छोटे व्यापारों का एक बड़े संगठन में सम्मिलित हो जाना। जैसे United State steel Company में लगभग 200 विनिर्माण (manufacturing) और परिवहन (transport) कंपनियां एकीकृत हो गई थी और पूरा इस्ताप बाजार उसके नियंत्रण में था। इस तरह 19वीं शताब्दी के अंत में विशालकाय निगमों के स्थापित होने से भावी कम्पनी नियंत्रित पूंजीवाद (Corporate Capitalism) की शुरूआत हुई। इस तरह गृहयुद्धोत्तर काल तीव्र आर्थिक परिवर्तनों और समेकन का युग था। इस युग में बड़े-बड़े औद्योगिक घराने पनपे और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए एकाधिकार (monopoly) का साम्राज्य फैला।
* बड़े-बड़े संगठन अब विशाल और गतिशील बाजार व्यवस्था से जुड़ रहे थे, अतः वे अपने यहां व्यावसायिक प्रबन्ध व्यवस्था लागू करने पर जोर देने लगे। वे चाहते थे कि उनके श्रमिकों एवं अन्य प्रबन्धकर्ताओं की देखभाल अधिक दक्षता से हो और काम व्यावसायिक प्रबंधन में प्रशिक्षित व्यक्ति ही कर सकते थे। प्रबंधन शिक्षा का विकास हुआ और कहा गया कि अब तक मनुष्य “आगे रहा है किन्तु आने वाले जमाने में व्यवस्था को आगे रहना होगा।” इसी सूत्र वाक्य को ध्यान में रख Accounting , Management और Marketing के कई व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू हुए तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कार्मिक विभाग (Personnel Deptt) स्थापित हुए।
 
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