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'''स्वराज''' का शाब्दिक अर्थ है - ‘स्वशासन’ या "अपना राज्य" ("self-governance" or "home-rule")। [[भारत]] के राष्ट्रीय आन्दोलन के समय प्रचलित यह शब्द आत्म-निर्णय तथा [[स्वाधीनता]] की माँग पर बल देता था। प्रारंभिक राष्ट्रवादियों (उदारवादियों) ने स्वाधीनता को दूरगामी लक्ष्य मानते हुए ‘स्वशासन’ के स्थान पर ‘अच्छी सरकार’ (ब्रिटिश सरकार) के लक्ष्य को वरीयता दी। तत्पश्चात् उग्रवादी काल में यह शब्द लोकप्रिय हुआ,स्वराज संकल्पना छत्रपति शिवाजी महाराज की भारत को दी हुई देन है जिन्होंने विदेशी मुस्लिम शासक,अंग्रेज़,पोर्तुगीज जैसे लोगो से लड़कर ४०० सालो के गुलामी खत्म कर के भारत में पहली बार किसी प्रदेश पे स्वराज प्राप्त किया था और ओ स्वराज समानता और न्याय पर आधारित था।खुद के याने स्व के राज के मुल लोगो का जो राज है ओ स्वराज। वहीं संकल्पना लेकर ब्रिटिश काल में जब [[बाल गंगाधर तिलक]] ने यह उद्घोषणा की कि ‘‘स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।’’ [[महात्मा गाँधी|गाँधी]] ने सर्वप्रथम 1920 में कहा कि ‘‘मेरा स्वराज भारत के लिए संसदीय शासन की मांग है, जो वयस्क मताधिकार पर आधारित होगा। गाँधी का मत था स्वराज का अर्थ है जनप्रतिनिधियों द्वारा संचालित ऐसी व्यवस्था जो जन-आवश्यकताओं तथा जन-आकांक्षाओं के अनुरूप हो।’’ वस्तुत: गांधीजी का स्वराज का विचार [[ब्रिटेन]] के राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, ब्यूरोक्रैटिक, कानूनी, सैनिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं का बहिष्कार करने का आन्दोलन था।
 
यद्यपि गांधीजी का स्वराज का सपना पूरी तरह से प्राप्त नहीं किया जा सका फिर भी उनके द्वारा स्थापित अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं ने इस दिशा में काफी प्रयास किये।
 
== स्वराज पर गाँधी के विचार ==
बेनामी उपयोगकर्ता