"अलंकार (साहित्य)" के अवतरणों में अंतर

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:आगे नदिया खरीपरी अपार, घोरा कैसे उतरे पार
:राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।।<ref name="kyon">{{cite web |url=http://aatmudgaar.blogspot.com/2008/04/blog-post_07.html|title=आत्म उदगार |access-date=[[23 अगस्त]] [[2008]]|format= पीएचटीएमएल|publisher= Anurag Agrawal|language=}}</ref>
 
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