"परिसंचरण तंत्र" के अवतरणों में अंतर

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;ऊर्ध्वदेह शाखा (upper extremity) की शिराएँ
 
हाथ के पृष्ठ पर की शिरा जालिकाएँ (plexuses) त्वचा द्वारा दिखाई देती है। इनसे तथा गहरी शिराओं का रुधिर करतल चापों में होता हुआ, बहि:प्रकोष्ठिका (radial), मध्यम और पुर: और पश्च अंत:प्रकोष्ठिक शिराओं द्वारा कुहनी के सामने पहुँचकर, मध्यम शिरा में पहुँचता है। गहरे भागों (पेशी आदि) से आनकुर शिराएँ भी इसी में मिल जाती हैं और तब वह मध्यम आधार (median basilic) शिरा और (median cephalic) मध्यम शीर्ष शिरा में विभक्त हो जाती है। एक या दो इंच आगे चलकर अंत:प्रकोष्ठिक शिराएँ आधार शिरा में और बहि:प्रकोष्ठिक शीर्ष शिराओं में जुट जाती हैं। आधार और शीर्ष शिराएँ बाहू के भीतरी और बाहरी पार्श्वों पर होती हुई ऊपर को चली जाती हैं और बाहरी धमनी की सहचारी शिराएँ (venae comites) शिराओं के मिलने के पश्चात् कक्षीय (axillary) शिरा में खुल जाती है जो स्वयं आगे चलकर अधोजत्रुक (subclavian vein) बन जाती है और अंत:गलशिरा से जुड़ने के पश्चात् अनामी शिरा बनाती है।
 
;निम्नशाखा (inferior extremity) की शिराएँ
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