"भारवि": अवतरणों में अंतर

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की काव्यरचना माना जाता है। इनका काल छठी-सातवीं शताब्दि बताया जाता है।
यह काव्य किरातरूपधारी [[शिव]] एवं पांडुपुत्र [[अर्जुन]] के बीच के
धनुर्युद्ध तथा वाद-वार्तालाप पर केंद्रित है। [[महाभारत]] के एकवन पर्व पर
आधारित इस [[महाकाव्य]] में अट्ठारह सर्ग हैं। भारवि सम्भवतः दक्षिण भारत
के कहीं जन्मे थे। उनका रचनाकाल पश्चिमी गंग राजवंश के राजा दुर्विनीत तथा
गुमनाम सदस्य