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चम्बल नदी के बीहड़ो से घिरा यह भू-पटल जिसे हम आज मुरैना नाम से जानते है असल मे कभी "पेंच' नाम से विख्यात था और यह पेंच नाम यहां पर लगी सरसों के तेल मील के कारण ग्रामीणों द्वारा दिया गया आम नाम था। समय के साथ साथ जब यहां पर मील में मजदूरों की संख्या बढ़ने लगी तो उन लोगों ने पास ही अपने घर बनाने प्रारम्भ कर दिए जो कुछ ही दिनों बाद उस मील के निकटतम गाँव (मुरैना गांव)तक विस्तृत हो गया। अंततः मुरैना जिले के मुख्यालय से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मुरैना गांव ने वर्तमान शहर को नाम दिया "मुरैना" जिसका अर्थ होता है मोरों का रैना (वास-स्थल) बस्तुतः हमारे देश का राष्ट्रीय पक्षी मोर यहां आज भी हर मुंडेर पर दिख ही जायेगा।
[[चित्र:Bismil statue.gif|thumb|right|200px|मुरैना (म०प्र०) में बरबई गाँव के पार्क में लगी राम प्रसाद बिस्मिल की प्रतिमा]]
सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी [[राम प्रसाद 'बिस्मिल']] के दादा जी नारायण लाल का पैतृक [[गाँव]] बरबई तत्कालीन [[ग्वालियर]] राज्य में [[चम्बल नदी]] के बीहड़ों में स्थित तोमरधार क्षेत्र (वर्तमान मध्य प्रदेश) के [[मुरैना]] जिले में आज भी है। बरबई ग्राम-वासी बड़े ही बागी प्रकृति के व्यक्ति थे जो आये दिन अँग्रेजों व अँग्रेजी आधिपत्य वाले ग्राम-वासियों को तंग करते थे। पारिवारिक कलह के कारण नारायण लाल ने अपनी पत्नी विचित्रा देवी व दोनों पुत्रों - मुरलीधर एवं कल्याणमल सहित अपना पैतृक गाँव छोड़ दिया। उनके गाँव छोडने के बाद बरबई में केवल उनके दो भाई - अमान सिंह व समान सिंह ही रह गये जिनके वंशज कोक सिंह आज भी उसी गाँव में रहते हैं। केवल इतना परिवर्तन अवश्य हुआ है कि बरबई गाँव के एक पार्क में राम प्रसाद बिस्मिल की एक भव्य [[प्रतिमा]] मध्य प्रदेश सरकार ने स्थापित कर दी है। <ref>https://www.youtube.com/watch?v=JDGVvXrLWUw&t=523s</ref>
 
== जौरा ==
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