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यह दैनिक भास्कर के साथ मिलने वाली एक साप्ताहिक पत्रिका है। यह हर बुधवार को प्रकाशित होती है। इसमें लघुकथा, मुस्कुराहट, चर्चित शब्द, अपनी हिंदी, मंजूषा आदि अनुभाग होते हैं।
 
=== रसरंग ===
 
=== '''नया लिबास पहनकर आज कश्मीर खिलखिलाया है,''' ===
 
=== जन्नत की वादियों में मुहब्बत का पैग़ाम आया है । ===
 
=== तमाम बरस घुटता रहा जहाँ ख़ुशबुओं का दम भी , ===
 
=== आज उन्हीं वादियों में गुलों पे फिर निखार छाया है । ===
 
=== चिनार की शाख़ों पर लिपटी हुयी थी राख की परतें जहाँ, ===
 
=== उन उजड़ी दरख़्तों पे रंगते लौटी हैं रौनक़ों का साया है । ===
 
=== बदली सी रुत है बदले मंज़र का मचा शोर हर ओर है, ===
 
=== कश्मीर की बरसती घटाओं ने सावन में क़हर ढाया है । ===
 
=== क़ुर्बान हुयी कश्मीर की ख़ातिर अनगिनत जानें, ===
 
=== हिसाब सबका इक-इक करके किसी ने आज चुकाया है । ===
 
=== ज़िंदगियाँ जहन्नुम की आग सा तड़प रही थीं यहाँ , ===
 
=== जन्नत का चिराग़ फिर रोशन हो जगमगाया है । ===
 
=== हवा में घुल चुकी थी गंदी सियासतों साज़िशों की बू जहाँ, ===
 
=== उसी गुलिस्ताँ की फ़िज़ाओं में ख़ुशबुओं का सरमाया है । ===
 
=== नये ख़्वाब नई उम्मीदों का आफ़ताब खिलेगा अब हर रोज़ यहाँ । ===
 
=== फ़लक पर आज माहताब का हुस्न चाँदनी में नहाया है । ===
 
=== अमन चैन के वाशिंदों नये बदलावों पर एतबार करना होगा , ===
 
=== मुमकिन है अब कुछ भी यहाँ तरक़्क़ी की तरफ तुमने क़दम बढ़ाया है। ===
 
=== क़ानून के रिसालों में दर्ज हुयी है आज की तारीख़ सदा के लिये, ===
 
=== कश्मीर के सीने पर मेरे तिरंगे का परचम सदा के लिये लहराया है। ===
मौलिक एवं स्वरचित
 
वंदना मोहन दुबे
 
गुडगांव (हरियाणा )
 
===नवरंग===