"चौपाई" के अवतरणों में अंतर

3 बैट्स् नीकाले गए ,  1 वर्ष पहले
सम्पादन सारांश रहित
(Shelves are empty (वार्ता) द्वारा किए बदलाव 4227439 को पूर्ववत किया)
टैग: किए हुए कार्य को पूर्ववत करना
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
चौपाई मात्रिक सम छन्द का एक भेद है। प्राकृत तथा अपभ्रंश के १६ मात्रा के वर्णनात्मक छन्दों के आधार पर विकसित हिन्दी का सर्वप्रिय और अपना छन्द है।<ref>{{cite book |last= |first= |title= हिन्दी साहित्य कोश, भाग- १|year=१९८५|publisher=ज्ञानमण्डल लिमिटेड|location=वाराणसी |id= |page=२४८ |accessday= |accessmonth= |accessyear= }}</ref>
गोस्वामी तुलसीदास ने [[रामचरित मानस]] में चौपाइ छन्द का बहुत अच्छा निर्वाह किया है। चौपाई में चारदो चरण होते हैं, प्रत्येक चरण में १६-१६ मात्राएँ होती हैं तथा अन्त में गुरु होता है।
 
== सन्दर्भ ==
बेनामी उपयोगकर्ता