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ईरान का प्राचीन नाम पार्स (फ़ारस) था और पार्स के रहने वाले लोग पारसी कहलाए, जो [[ज़रथुस्त्र]] के अनुयायी थे और सूर्य व अग्नि पूजक थे। सातवीं शताब्दी में [[अरब|अरबों]] ने पार्स पर विजय पाई और वहाँ जबरन [[इस्लाम]] का प्रसार हुआ। वहां की जनता को जबर से इस्लाम में मिलाया जा रहा था इसलिए जो पारसी इस्लाम अपना गए वो आगे चलकर शिया मुस्लमान कहलाय व उत्पीड़न से बचने के लिए बहुत से पारसी [[भारत]] आ गए। वे अपना मूल धर्म (सूर्य पूजन) नहीं छोड़ना चाहते थे| आज भी दक्षिण एशियाई देश भारत में पारसी मंदिर देखने को मिलते हैं |
 
इस्लाम में ईरान का एक विशेष स्थान है। सातवीं सदी से पहले यहाँ जरथुस्ट्र धर्म के अलावा कई और धर्मों तथा मतों के अनुयायी थे। अरबों द्वारा ईरान विजय (फ़ारस) के बाद यहाँ शिया इस्लाम का उदय हुआ। आज ईरान के अलावा भारत, दक्षिणी इराक, अफ़ग़ानिस्तान, अजरबैजान तथा पाकिस्तान में भी शिया मुस्लिमों की आबादी निवास करती है। लगभग सम्पूर्ण [[अरब]], [[मिस्र]], [[तुर्की]], उत्तरी तथा पश्चिमी इराक, लेबनॉन को छोड़कर लगभग सम्पूर्ण मध्यपूर्व, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताज़िकिस्तान तुर्केमेनिस्तान तथा भारतोत्तर पूर्वी एशिया के मुसलमान मुख्यतः सुन्नी हैं। बहाई धर्म की शुरुआत ईरान से ही हुई और उसके संस्थापक अवतार बाब और बहाउल्लाह शीराज़ और तेहरान से ही हैं।
 
19वीं शताब्दी में तेहरान में सन 1844 को बहाई धर्म का उदय हुआ जब सैयद अली मोहम्मद जिन्हें बाब के नाम से जाना जाता है ने यह घोषणा की कि वे अब नए अवतार हैं और जल्दी ही बहाउल्लाह विश्व अवतार के रूप में जन्म लेने वाले हैं , 1863 में बहाउल्लाह ने बहाई धर्म की नींव अपने अवतार होने के साथ की। ईरान में शिया मुस्लिम किसी अन्य धर्म को मान्यता नही देता उसके बावजूद जरथुस्त्र, ईसाई, बहाई , यहूदी धर्म के समुदाय यहां पर निवास करते हैं।
 
== अर्थव्यवस्था ==
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