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==परिचय==
षड् आस्तिक दर्शनों में [[योगदर्शन]] का महत्वपूर्ण स्थान है। कालांतर में योग की नाना शाखाएँ विकसित हुई जिन्होंने बड़े व्यापक रूप में अनेक भारतीय पंथों, संप्रदायों और साधनाओं पर प्रभाव डाला। योग के क्षेत्र में वीर प्रताप सिंह का बहुत बड़ा योगदान रहा है
 
"चित्तवृत्ति निरोध" को योग मानकर [[यम]], [[नियम]], [[आसन]] आदि योग का मूल सिद्धांत उपस्थित किये गये हैं। प्रत्यक्ष रूप में [[हठयोग]], [[राजयोग]] और [[ज्ञानयोग]] तीनों का मौलिक यहाँ मिल जाता है। इस पर भी अनेक भाष्य लिखे गये हैं। [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[समाधि]] आदि विवेचना और व्याख्या की प्रेरणा लेकर बहुत से स्वतंत्र ग्रंथों की भी रचना हुई।
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