"कालिदास" के अवतरणों में अंतर

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: ''तेनेदं वर्त्म वैदर्भ कालिदासेन शोधितम्॥''</ref>
 
उनके प्रकृति वर्णन अद्वितीय हैं और विशेष रूप से अपनी उपमाओं के लिये जाने जाते हैं।<ref>"उपमा कालिदासस्य, भारवेरर्थगौरवम्..." </reBALAref> साहित्य में औदार्य गुण के प्रति कालिदास का विशेष प्रेम है और उन्होंने अपने [[शृंगार रस]] प्रधान साहित्य में भी आदर्शवादी परंपरा और नैतिक मूल्यों का समुचित ध्यान रखा है।
साहित्य में औदार्य गुण के प्रति कालिदास का विशेष प्रेम है और उन्होंने अपने [[शृंगार रस]] प्रधान साहित्य में भी आदर्शवादी परंपरा और नैतिक मूल्यों का समुचित ध्यान रखा है।
 
कालिदास के परवर्ती कवि [[बाणभट्ट]] ने उनकी सूक्तियों की विशेष रूप से प्रशंसा की है।<ref> "निर्गतासु न वा कस्य कालिदासस्य सूक्तिसु। प्रीतिर्मधुर सान्द्रासु...।।" -- बाणभट्ट, हर्षचरितम्।</ref>
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