"नरसिंह" के अवतरणों में अंतर

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===हाटपिप्लिया===
नृसिंह मंदिर हाटपिप्लिया में भगवान नरसिंह कि ७.५ कि लो वजनी पाषाण प्रतिमा है जो कि हर वर्ष डोल ग्यारस पर्व पर भमोरी नदी पर 3 बार तेराई जाती है
इस मंदिर में त्रिपदा माँ गायत्री की संगमरमर की प्रतिमा भी है जो लग भग 500साल पुरानी बताई जाती है व साथ ही तकरीबन 800साल पुराना खेडापती हनुमान मंदिर भी इसी प्रांगण मे है
जन्माष्टमी, गोपाष्टमी,डोलग्यारस,व नृसिंह चौदस यह त्यौहार यहा पर प्रमुखता से मनाए जाते है।।
 
'''<big>बनमनखी बिहार</big>'''
 
ऐसी मान्यता है कि प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप का किला सिकलीगढ़ में था। गांव के बड़े बुजुर्गों की माने तो अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए खंभे से भगवान नरसिंह ने अवतार लिया था। मान्यता है कि उस खंभे का एक हिस्सा जिसे '''माणिक्य स्तंभ''' के नाम से जाना जाता है वो आज भी मौजूद है। इसी स्थान पर प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप का वध हुआ था। खास बात ये है कि माणिक्य स्तंभ 12 फीट मोटा है और करीब 65 डिग्री पर झुका हुआ है।
 
===नरसिंह देव मन्दिर जबेरा (मध्यप्रदेश)===
मध्यप्रदेश के दमोह जिले के जबेरा ग्राम में नरसिंह देव जी का अति प्रचीन मन्दिर है यहाँ पर स्थित मन्दिर की "चौकठ" की पूजा की जाती है। लोगो का मानना है की यहाँ पर की जाने वाली सभी प्रार्थना स्वीकार होतीं हैं ।
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