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'''स्वदेशी''' का अर्थ है- 'अपने देश का' अथवा 'अपने देश में निर्मित'। वृहद अर्थ में किसी भौगोलिक क्षेत्र में जन्मी, निर्मित या कल्पित वस्तुओं, नीतियों, विचारों को स्वदेशी कहते हैं। वर्ष 1905 के [[बंग-भंग]] विरोधी जनजागरण से स्वदेशी आन्दोलन को बहुत बल मिला, यह 1911 तक चला और गाँधी जी के [[भारत]] में पदार्पण के पूर्व सभी सफल अन्दोलनों में से एक था। [[अरविन्द घोष]], [[रवीन्द्रनाथ ठाकुर]], [[वीर सावरकर]], लोकमान्य [[बाल गंगाधर तिलक]] और [[लाला लाजपत राय]] स्वदेशी आन्दोलन के मुख्य उद्घोषक थे।<ref>{{cite book |last1=क्रान्त |first1=मदनलाल वर्मा|authorlink1= |last2= |first2= |editor1-first= |editor1-last= |editor1-link= |others= |title=स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास |url=http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 |format= |accessdate= |edition=1 |series= |volume=1 |date= |year=2006 |month= |origyear= |publisher=प्रवीण प्रकाशन |location=नई दिल्ली | language = hi |isbn= 81-7783-119-4|oclc= |doi= |id= |page=84 |pages= |chapter= |chapterurl= |quote= |ref= |bibcode= |laysummary= |laydate= |separator= |postscript= |lastauthoramp=}}</ref>
आगे चलकर यही स्वदेशी आन्दोलन [[महात्मा गांधी]] के स्वतन्त्रता आन्दोलन का भी केन्द्र-बिन्दु बन गया। उन्होंने इसे "[[स्वराज]] की आत्मा" कहा। खुशवंत प्रताप यादव के द्वारा
 
== स्वदेशी का आधार ==
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