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ऐतिहास
मंदिर की वर्तमान इमारत 1931 में बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह द्वारा उस स्थान पर बनवाई गई है जहां रामदेव जी नें अपने नश्वर शरीर को त्यागा था। रामदेव जी के मुख्य शिष्यों की समाधियां भी पांच मुस्लिम पीरों की कब्रों के साथ मंदिर परिसर में स्थित है। ये पीर मक्का से यहाँ रामदेव जी, जिन्हें उनके समुदाय में 'राम शाह पीर' कहा जाता था, को श्रद्धांजलि देने के लिए आये थे।
गांव के पास एक रामसर नामक पोखर स्थित है, और लोगों का मानना है कि स्वंय बाबा ने इसका निर्माण किया था। वहाँ मंदिर के आसपास के क्षेत्र में एक सीढ़ीदार कुआं स्थित है।ऐसा माना जाता है कि इसके पानी में असाधारण चिकित्सा शक्तियां है।
यहाँ भादवा की दूज को विशाल मेला लगता है। और बाबा के दर्सन के लिए यहां भादवा की दूज तक 80.से 90 लाख भक्त आते है। यहाँ चढेचढावे में आए हुए पैसो का बाबा की 17 वी पीढ़ी में हर महीने प्रसाद के रूप में 1900 तंवर में बाट दिए जाते है
ये परम्परा बाबा के समाधि लेने के बाद से चलती आरही है। हर साल प्रत्येक वक्ति को 4 लाख से 5 लाख तक बात प्रसाद के रूप में दिया जाता है।
मंदिर के पूरी व्यवस्था बाबा के वंसज ही संभाल ते है।
 
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बेनामी उपयोगकर्ता