"चौपाई" के अवतरणों में अंतर

1,398 बैट्स् जोड़े गए ,  1 वर्ष पहले
सम्पादन सारांश रहित
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
गोस्वामी तुलसीदास ने [[रामचरित मानस]] में चौपाइ छन्द का बहुत अच्छा निर्वाह किया है। चौपाई में दो चरण होते हैं, प्रत्येक चरण में १६-१६ मात्राएँ होती हैं तथा अन्त में गुरु होता है।
 
पहचान
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{रस छन्द अलंकार}}
 
चौपाई छन्द 16 मात्राओं के चरण का छन्द होता है। चौपाई के चरणान्त से एक लघु निकाल दिया जाय तो चरण की कुल मात्रा 15 रह जाती है और चौपाई छन्द का नाम बदल कर 'चौपई' हो जाता है। इस तरह चौपई का चरणांत गुरु-लघु हो जाता है। यही इसकी मूल पहचान है। अर्थात् चौपई 15 मात्राओं के चार चरणों का सम मात्रिक छन्द है। इस छंद का एक और नाम 'जयकरी' या 'जयकारी' छन्द भी है।
[[श्रेणी:हिन्दी साहित्य]]
 
चौपाई की कुल 16 मात्राओं के एक चरण का विन्यास निम्नलिखित होता है [2]
 
चार चौकल
दो चौकल + एक अठकल
दो अठकल
उपरोक्त विन्यास में से अंत का एक लघु हटा दिया जाय तो उसका विन्यास इस प्रकार बनता है। यह चौपई छन्द का विन्यास होगा-
 
तीन चौकल + गुरु-लघु
एक अठकल + एक चौकल + गुरु-लघु
 
Ankit Gurjar
7

सम्पादन