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(अहीर)यादवों का वर्चस्व है।
लौहरपुरा,सलमपुरा,रतवा,देहगांव,उमरी,अकोड़ा आदि यादवों के बड़े गांव है।
अटेर तहसील मैं चौम्हों गांव भदौरियों का सबसे बड़ा गांव है इस गांव मैं प्रचीन शिव मंदिर चौमुखा महराज मंदिर चाँबड़ माता मंदिर व ठाकुर जी मंदिर प्रमुख है ये गांव फौजियों के गांव के नाम से जाना जाता है यहां हर परिवार मे आपको फौजी वीर मिलेंगे इसी पंचायत मैं अंगदपुरा भी है जो भदौरियों का गांव है गडेर,जमौरा,किशुपुरा ,परा भदौरियों का वर्चस्व है अटेर विधानसभा मैं भदौरियों का विशेष महत्व है यहां से विधायक भी अरविन्द सिंह भदौरिया है
 
हचंदपुरा,कचोंगरा,परसोना(भदौरियारहित गॉव)
भिंड के ये ग्राम की प्रमुख विशेषता है।
भिण्ड में भदौरिया राजाओं के काल से ही यहाँ पर गॉव कर मुक्त ओर स्वतंत्र रहे है। भिण्ड के गॉव के लोगो का कृषि ही एक मात्र रोजगार का साधन है।
आजादी के बाद से यहाँ के लोग को एक नई पहचान
मिली वो देश की सेवा में संलग्न हो गए। ओर तभी यहाँ के लोग सेना में जाकर देश की रक्षा करते हैं और सबसे अधिक सेना में शहीद भी भिण्ड के लाल वीर सपूत हुए है यह के हर 6 घर मे एक फौजी बेटा होता है
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